दिल्ली से सटे फरीदाबाद से स्वास्थ्य विभाग की एक ऐसी डरावनी तस्वीर सामने आई है, जिसने इंसानियत को कटघरे में खड़ा कर दिया है. फरीदाबाद के बडौली गांव की रहने वाली एक गर्भवती महिला को जब प्रसव पीड़ा हुई, तो परिवार उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचा. लेकिन अस्पताल के सारे दरवाजे बंद थे, जिसके चलते तड़पती हुई महिला को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा.
पीड़ित महिला के पति देवेंद्र और देवर चमन ने बताया कि महिला की हालत बिगड़ने पर वे उसे आनन-फानन में सेक्टर-3 स्थित प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (FRU-2) लेकर पहुंचे थे. अस्पताल पहुंचने पर उन्हें केंद्र के सभी गेट अंदर से बंद मिले.
देवर चमन ने अंदर मौजूद स्टाफ को जगाने के लिए तमाम दरवाजे और खिड़कियां खटखटाईं, लेकिन कोई भी गेट खोलने को तैयार नहीं हुआ. महिला की प्रसव पीड़ा इतनी असहनीय हो गई कि वह अस्पताल के बाहर सड़क पर ही बैठ गई और वहीं उसकी डिलीवरी हो गई.
डिलीवरी के बाद खुला स्टाफ का कमरा, देवर ने बनाया वीडियो
परिजनों का आरोप है कि जब तक अस्पताल का स्टाफ बाहर आया, तब तक बच्चा सड़क पर जन्म ले चुका था. इस पूरी घटना और बदइंतजामी से आक्रोशित होकर महिला के देवर चमन ने मौके पर ही मोबाइल से वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया है.
प्रशासन ने मानी गलती, कार्रवाई का भरोसा
इस पूरे मामले में चौतरफा घिरने के बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी गंभीर लापरवाही को स्वीकार कर लिया है. अधिकारियों का कहना है कि घटना के समय ड्यूटी पर तैनात जिस स्टाफ ने लापरवाही बरती है, उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है.
प्रशासन ने दावा किया है कि वे अब ऐसी पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे हैं ताकि भविष्य में किसी भी दूसरी महिला को इस तरह के भयानक और अमानवीय अनुभव से न गुजरना पड़े.
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