ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पिछले साल अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हुए भीषण 12 दिवसीय संघर्ष की पहले बरसी के मौके पर देश की जनता को संबोधित कर महत्वपूर्ण बयान जारी किया. उन्होंने इस दौरान जनता की अटूट एकजुटता, बलिदान और आर्थिक चुनौतियों के बीच उनके अदम्य साहस को सलाम किया है.
पेजेश्कियान ने पिछले साल अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिवसीय संघर्ष की पहली बरसी पर इमोशनल संदेश जारी कर कहा कि जियोनिस्ट दुश्मन ने गलत एनालिसिस और भ्रम के आधार पर ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की हत्या, परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाने और बुनियादी ढांचे तथा आवासीय इलाकों पर हमले करके ईरानी राष्ट्र की दृढ़ता को तोड़ने की कोशिश की थी. लेकिन इसके बजाय ईरानी जनता ने साहस, शहीद नेता की दूरदर्शी नेतृत्व और सशस्त्र बलों की तैयारियों के साथ अद्वितीय प्रतिरोध का प्रदर्शन किया और दुश्मन की साजिशों को नाकाम कर दिया.
राष्ट्रपति के मुताबिक, ईरान पर थोपे गए युद्ध ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने ये साबित कर दिया कि वैचारिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं में तमाम मतभेदों के बावजूद, जब बात हमारे प्यारे ईरान की सुरक्षा पर आती है तो हम सब एक उद्देश्य के साथ एकजुट होकर खड़े होते हैं. इसी अटूट पवित्र राष्ट्रीय एकता ने अंततः दुश्मनों की योजनाओं को विफल किया.
‘ये आपके धैर्य की परीक्षा है’
देशवासियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने बेहद संवेदनशीलता के साथ कहा कि एक विनम्र सेवक के रूप में, मैं पिछले एक साल के दौरान आपके द्वारा झेली गई आर्थिक चुनौतियों और भारी दबावों से पूरी तरह वाकिफ हूं. आपका ये धैर्य हमारे लिए एक बहुत बड़ी परीक्षा और एक भारी जिम्मेदारी की तरह है, जिसे सरकार बेहद ईमानदारी के साथ महसूस करती है.
पेज़ेशकियान ने भावुक होते हुए कहा कि इन कठिन महीनों में भले ही सरकार ने खुद कई सीमाओं और भारी दबावों का सामना किया है, लेकिन वह एक पल के लिए भी आपकी समस्याओं से दूर नहीं हुई. सरकार के प्रतिनिधि दिन-रात आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और देश की इस जटिल परिस्थिति में आपके बोझ को कम करने के लिए हमारा दृढ़ संकल्प अटूट है.
सैनिकों और कमांडरों की दी श्रद्धांजलि
इस ऐतिहासिक रक्षा के बाद आगे की चुनौतियों से पार पाने के लिए राष्ट्रपति ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई के मूल संदेश पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश की प्रगति के लिए राष्ट्रीय एकता को बनाए रखना, अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार बढ़ाना और सार्वजनिक सतर्कता सुनिश्चित करना सबसे आवश्यक है.
उन्होंने युद्ध में शहीद हुए सैनिकों और कमांडरों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके खून से ईरान के गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है.
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन के अंत में विश्वास जताया कि हमारे देश की असली और अपूरणीय ताकत हमारे लोगों की अद्वितीय एकजुटता, हमारे युवाओं की असाधारण प्रतिभा और एक बेहतर कल की उम्मीद में निहित है. जैसे हम अतीत की कठिन परीक्षाओं से जीतकर निकले हैं, वैसे ही आगे भी हम अपनी प्रगति के झंडे को हमेशा ऊंचा रखेंगे.
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