गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी में रविवार को बुलडोजर एक तीन मंजिला मजार के सामने रुका. कुछ ही देर में पूरी इमारत मलबे में बदल गई. प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई. जिस जगह पर यह मजार बनी थी, वह यूपीएसआईडीए (UPSIDA) की जमीन है और ग्रीन बेल्ट एरिया में आती है. कई नोटिस देने के बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई.
प्रशासन के मुताबिक, इस निर्माण की शुरुआत साल 2001 में एक छोटे से ढांचे से हुई थी. समय के साथ कथित तौर पर आसपास की जमीन पर भी कब्जा बढ़ता गया. करीब ढाई दशक में यह निर्माण तीन मंजिल तक पहुंच गया और लगभग 300 वर्ग गज से अधिक क्षेत्र में फैल गया.

रविवार को प्रशासन और पुलिस की टीम भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मौके पर पहुंची. पूरे इलाके की घेराबंदी की गई और इसके बाद बुलडोजर से निर्माण को गिराने की कार्रवाई शुरू हुई. प्रशासन का कहना है कि इस दौरान पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था.
अधिकारियों का कहना है कि संबंधित पक्ष को कई बार नोटिस जारी किए गए थे. नोटिस में निर्माण हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन तय समय के भीतर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए ध्वस्तीकरण का फैसला लिया गया.

प्रशासन का कहना है कि जिस जमीन पर निर्माण किया गया था, वह यूपीएसआईडीए की है और इंडस्ट्रियल एरिया के ग्रीन बेल्ट का हिस्सा है. ऐसे क्षेत्रों में स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं होती. इसी आधार पर इसे अतिक्रमण मानते हुए कार्रवाई की गई. फिलहाल प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा. वहीं, पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई.
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है. इस मामले में भी प्रशासन का कहना है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नोटिस जारी करने और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही की गई.
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