अमेरिका और ईरान अब एक दूसरे पर नहीं करेंगे हमले, कतर में हाई लेवल मीटिंग पर बनी बात – United States and Iran agree to stop attacking each other ntc rmxk


हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास  अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी बढ़ गई थी और दोनों मुल्कों ने एक दूसरे के ठिकानों पर जमकर बमबारी की थी. हालांकि अब ताजा डील के बाद दोनों देश एक दूसरे पर हमले नहीं करने पर सहमत हो गए हैं.

दोनों देशों के प्रतिनिधि मंगलवार को कतर में मिलेंगे, जहां हाई लेवल मीटिंग होनी है. इसका उद्देश्य हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव के बाद उस नाजुक शांति समझौते को बचाना है, जिस पर दोनों पक्षों के बीच मोहर लगी थी.

दरअसल होर्मुज में कार्गो शिप पर ईरानी अटैक के बाद संघर्ष का दायरा बढ़ने लगा था. 24 घंटे के भीतर अमेरिका ने दो बार ईरान की मिलिट्री साइट्स और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया. ईरान ने भी अमेरिका के सहयोगियों के ठिकानों पर हमले का दावा किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तो ईरान को सख्त चेतावनी दे डाली थी.

कतर में होनी है बातचीत
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रहने तक सभी प्रकार के मिलिट्री एक्शन को अस्थायी रूप से रोकने पर सहमति बनाई है. कतर में होने वाली बातचीत में होर्मुज से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा होगी. प्रस्तावित वार्ता को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि मंगलवार को होने वाली वार्ता से पहले अमेरिका और ईरान ने सैन्य अभियान अस्थायी रूप से रोकने पर सहमति जताई है. फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने पर सहमत हुए हैं. बातचीत जारी रहने तक होर्मुज में कमर्शियल शिप्स की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रहेगी.

होर्मुज से जुड़े विवादों पर फोकस
शुरुआत में यह मीटिंग स्विट्जरलैंड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बाचतीत के हिस्से के रूप में प्रस्तावित थी. हालांकि ताजा सैन्य टकराव के बाद राजनयिकों ने बैठक का स्थान बदलकर दोहा कर दिया. बैठक का एजेंडा सीमित कर केवल होर्मुज से जुड़े विवादों पर केंद्रित कर दिया.

अमेरिकी टेक्निकल टीम के प्रमुख निक स्टीवर्ट के भी इस बैठक में शामिल होने की संभावना है. हालांकि व्हाइट हाउस ने प्रस्तावित वार्ता पर अभी तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है.

ईरान की इस मांग पर फंसा पेंच
दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लागू करने में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा है. समझौते के अनुसार, ईरान ने इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का वादा किया था. बदले में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने पर सहमति दी थी.

भविष्य में ऐसे टकराव से बचने के लिए पिछले सप्ताह स्विट्जरलैंड में अमेरिकी सेना और आईआरजीसी के बीच हॉटलाइन स्थापित करने पर सहमति बनी थी, ताकि जहाजों की आवाजाही का बेहतर समन्वय किया जा सके. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक शुरू नहीं हो सकी थी.

इसी दौरान ईरान ने यह मांग दोहराई कि होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाज सीधे ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय करें. वहीं अमेरिका का कहना है कि यह मांग मूल समझौते की सीमा से आगे जाती है.

इसी के बाद दोनों मुल्कों के बीच तल्खी बढ़ गई थी. होर्मुज में ईरानी कार्रवाई और जवाब में अमेरिकी आर्मी के स्ट्राइक से तनाव और भड़क गया था.

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