रुला रहा अल-नीनो: दिल्ली में पारा 42 पर फील लाइक टेंपरेचर 51 डिग्री, ऐसा क्यों? – delhi heat 42 feels like temperature 51 degree Celsius why


दिल्ली-NCR इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है. मौसम विभाग के अनुसार तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, लेकिन असली परेशानी फील लाइक टेम्परेचर की है जो 51 डिग्री तक जा पहुंचा है. लोग कह रहे हैं कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है.वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो का असर और हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) बढ़ने से यह स्थिति बनी है.

अल-नीनो प्रशांत महासागर में पानी के गर्म होने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. यह हर कुछ सालों में आता है. दुनिया के मौसम को प्रभावित करता है. इस बार अल-नीनो के कारण भारत में गर्मी बढ़ गई है. यह न सिर्फ तापमान बढ़ाता है बल्कि हवा में नमी भी बढ़ा देता है. 

दिल्ली जैसे शहरों में जब नमी 60-70 प्रतिशत तक पहुंच जाती है तो गर्मी और भी असहनीय हो जाती है. सामान्य 42 डिग्री तापमान अचानक 51 डिग्री जैसा महसूस होने लगता है.

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वेट बल्ब टेम्परेचर – असली खतरा

वेट बल्ब टेम्परेचर वह माप है जो बताता है कि शरीर कितनी गर्मी सह सकता है. जब ह्यूमिडिटी ज्यादा होती है तो पसीना सूखता नहीं है. शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं होता. वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि अगर वेट बल्ब टेम्परेचर 35 डिग्री से ऊपर चला जाए तो इंसान के लिए जानलेवा हो सकता है. दिल्ली में वर्तमान स्थिति में नमी के कारण यही हो रहा है. 42 डिग्री का तापमान 51 डिग्री फील लाइक बन रहा है.

El-Nino Delhi Heatwave

दिल्ली में गर्मी सिर्फ धूप की वजह से नहीं बढ़ रही. शहर में प्रदूषण, कंक्रीट जंगल और नमी का मिला-जुला प्रभाव है. लोगों को दिन भर पसीना आ रहा है. थकान हो रही है. सिर दर्द और चक्कर आ रहे हैं. बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है. अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मरीज बढ़ गए हैं.

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अल-नीनो का असर

अल-नीनो सिर्फ गर्मी नहीं ला रहा. कुछ इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ की आशंका भी है. लेकिन दिल्ली-NCR जैसे उत्तरी इलाकों में मुख्य समस्या गर्मी और नमी की है. वैज्ञानिक कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण अल-नीनो के प्रभाव और तेज हो गए हैं. अब ऐसी घटनाएं पहले से ज्यादा खतरनाक हो रही हैं.

यह गर्मी सिर्फ इस साल की नहीं है. जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले सालों में ऐसी स्थिति और बदतर हो सकती है. दिल्ली जैसे शहरों को ग्रीन कवर बढ़ाना होगा. कंक्रीट कम करना होगा. बेहतर कूलिंग व्यवस्था बनानी होगी. अल-नीनो हमें याद दिला रहा है कि प्रकृति से छेड़छाड़ का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है. 

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