जैमर भी फेल, वाई-फाई से लाइव स्ट्रीम, SSC भर्ती में नकल कराने वाला शातिर अलवर से गिरफ्तार, घर से मिली 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन – ssc exam cheating racket stf arrests lokesh rajasthan high tech copying lclar


उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने SSC की भर्ती परीक्षा में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले गैंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक और फरार आरोपी को गिरफ्तार किया है. एसटीएफ ने आरोपी लोकेश को राजस्थान के अलवर से पकड़ा. जांच में सामने आया है कि भर्ती परीक्षा में इस्तेमाल की गई मॉडिफाइड TFT स्क्रीन उपलब्ध कराने में उसकी अहम भूमिका थी.

एसटीएफ के अनुसार, यह मामला एसएससी द्वारा आयोजित सीएपीएफ, एसएसएफ कांस्टेबल और असम राइफल्स राइफलमैन भर्ती परीक्षा-2026 से जुड़ा है. इस मामले में 22 मई 2026 को ग्रेटर नोएडा के एक परीक्षा केंद्र से गिरोह के सरगना समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. पूछताछ और जांच के दौरान पता चला कि परीक्षा में इस्तेमाल की गई मॉडिफाइड TFT स्क्रीन लोकेश ने उपलब्ध कराई थी. इसके बाद से वह फरार चल रहा था.

घर से मिला हाईटेक उपकरणों का जखीरा

गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने लोकेश के घर की तलाशी ली गई. वहां से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए. इनमें 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन, 45 VGA कार्ड, 20 VGA टू HDMI कार्ड, 15 टाइप-सी केबल, 14 रास्पबेरी पाई डिवाइस, 12 मेमोरी कार्ड, 10 USB-टू-USB केबल और 5 VGA स्विच शामिल हैं. इसके अलावा राउटर, चार्जर, कॉपर वायर, स्क्रूड्राइवर, ग्लू गन, वाई-फाई डोंगल, हीट सिंक और कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए गए हैं.

पूछताछ में लोकेश ने बताया कि उसने वर्ष 2013 में कंप्यूटर हार्डवेयर और नेटवर्किंग का कोर्स किया था. बाद में उसे मॉडिफाइड TFT स्क्रीन बनाने की तकनीक मिली. इसके बाद उसने ऐसी स्क्रीन तैयार करनी शुरू कर दी और उन्हें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सप्लाई करने लगा.

एसटीएफ के मुताबिक, ये मॉडिफाइड TFT स्क्रीन बाहर से बिल्कुल सामान्य कंप्यूटर स्क्रीन जैसी दिखाई देती थीं. लेकिन इनके जरिए परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर की स्क्रीन को वाई-फाई डोंगल और विशेष राउटर की मदद से बाहर बैठे सॉल्वर तक लाइव स्ट्रीम किया जाता था. इसके बाद सॉल्वर सवाल हल करके अभ्यर्थी तक जवाब पहुंचाता था.

जैमर भी नहीं रोक पाते थे यह तकनीक

जांच एजेंसी के अनुसार, गिरोह ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करता था, जिन पर परीक्षा केंद्रों में लगाए गए जैमर का भी असर नहीं होता था. इसी वजह से यह हाईटेक सिस्टम लंबे समय तक पकड़ में नहीं आया. लोकेश ने पूछताछ में बताया कि एक मॉडिफाइड TFT स्क्रीन तैयार करने में करीब 40 हजार रुपये का खर्च आता था. वह स्क्रीन तैयार कर सप्लाई करने के लिए प्रति स्क्रीन 5 हजार रुपये अलग से वसूलता था.

फिलहाल एसटीएफ आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हाईटेक नकल गिरोह का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है और इसमें अभी कितने लोग शामिल हैं. मामले में आगे की जांच जारी है.
 

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