बांग्लादेश से निष्कासन की दूसरी बरसी पर उनकी पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेशी आवामी लीग की अध्यक्षा शेख हसीना ने संबोधन किया। इस कार्यक्रम में शेख हसीना ने कहा कि ये वो बांग्लादेश नहीं जिसके लिए 30 लाख लोग बलिदान हुए। 1971 का मूवमेंट हुआ। यह कहते हुए शेख हसीना इमोशनल भी हो गईं। मैं एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर बोल रही हूं जिसने अपनी जिंदगी बांग्लादेश के लोगों के साथ बिताई है, जिसे अपने देश से दूर जाने पर मजबूर होना पड़ा, लेकिन मैं कभी भी अपने लोगों से अलग नहीं हुई। शेख हसीना बोलीं कि मुझे अपने भविष्य की नहीं, बांग्लादेश के फ्यूचर की चिंता है। बांग्लादेश के लोगों को सुरक्षा, विकास, समृद्धि और शांति चाहिए
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शेख हसीना का बड़ा हमला! 'बांग्लादेश को बचाना होगा'
