ईरान की घेराबंदी को लेकर अमेरिका ने अपने तेवर बेहद सख्त कर लिए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर भारी-भरकम आर्थिक पाबंदियां लगाने की बात कही है. उन्होंने इसे इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक जंग बताया है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है. किन देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, इसकी तस्वीर भी साफ होना बाकी है. इस बीच समंदर से लेकर अंतरिक्ष तक अमेरिका एक साथ कई बड़े मोर्चों पर सक्रिय नजर आ रहा है.
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक अभियान की बात कही है. इसका मकसद तेहरान तक पहुंचने वाले पैसों के रास्ते को रोकना बताया जा रहा है. उन्होंने उन देशों को भी चेतावनी दी है जो ईरान को आर्थिक मदद या किसी तरह का सहारा देते हैं.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस अभियान का असली दायरा कितना होगा. अभी कोई नया कार्यकारी आदेश जारी नहीं हुआ है. साथ ही उन देशों के नाम भी सामने नहीं आए हैं, जिन्हें प्रस्तावित कदमों में सीधे निशाना बनाया जा सकता है.
समंदर में भी बढ़ा दबाव
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से भी ईरान पर बढ़ते दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, 20 अगस्त तक 67 व्यापारिक जहाजों को ईरान की नाकाबंदी के दौरान रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया गया. तीन जहाजों को निष्क्रिय किया गया, जबकि दो पर सवार होकर जांच की गई.
अमेरिकी नौसैनिक अभियान के दौरान अरब सागर में USS Boxer से MV-22B Osprey विमान भी उड़ान भरते दिखे. यह जहाज ईरान पर लागू अमेरिकी नाकाबंदी को लागू कराने वाले अभियान में शामिल है.
हिज्बुल्लाह पर भी अमेरिका की कार्रवाई
ईरान पर दबाव बढ़ाने के बीच अमेरिका ने हिज्बुल्लाह के खिलाफ भी नए प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने संगठन के ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कुद्स फोर्स से संबंधों का हवाला दिया है. साथ ही संगठन की पहले से मौजूद आतंकी सूची वाली पहचान को फिर से लागू किया गया.
अमेरिका ने हिज्बुल्लाह से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर भी निशाना साधा है. नए प्रतिबंधों का मकसद संगठन तक पहुंचने वाले पैसे के रास्ते को रोकना है. यह कार्रवाई ईरान पर प्रस्तावित व्यापक आर्थिक दबाव से अलग है, लेकिन दोनों कदमों से वॉशिंगटन की मौजूदा नीति साफ होती है कि तेहरान पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ाया जा रहा है.
2030 तक हर साल 1000 स्पेस मिशन का टारगेट
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने स्पेस सेक्टर में भी अपनी रफ्तार बढ़ाने का फैसला किया है. डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए मेमो पर दस्तखत किए हैं, जिसके तहत अंतरिक्ष मिशनों को नई ऊंचाई पर ले जाया जाएगा. नए लक्ष्य के मुताबिक साल 2030 तक हर साल 1000 से ज्यादा रॉकेट लॉन्च और री-एंट्री कराने की क्षमता तैयार की जाएगी.
अभी क्या साफ नहीं?
अभी यह तय नहीं है कि ट्रंप का अगला आर्थिक कदम किन देशों, कंपनियों या वित्तीय संस्थानों को प्रभावित करेगा. इसी वजह से प्रस्तावित अभियान को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है.
इतना जरूर है कि अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के कई मोर्चे खोल दिए हैं. एक तरफ आर्थिक कार्रवाई की तैयारी है, दूसरी तरफ समुद्र में नाकाबंदी जारी है. आने वाले दिनों में नए आदेश सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि ट्रंप का यह अभियान कितना बड़ा होगा.
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