‘आचार संहिता का उल्लंघन, चुनावी भाषण’, PM मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर विपक्ष का हमला – pm modi national address opposition criticism womens reservation election controversy ntc ntyv


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शनिवार को राष्ट्र के नाम दिए संबोधन की विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की है. विपक्षी दलों का कहना है कि पीएम घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं. विपक्ष ने उन पर लोकतांत्रिक मानदंडों का उल्लंघन और आदर्श आचार संहिता के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया है, क्योंकि उनका ये संबोधन कई राज्यों में जारी विधानसभा चुनावों के बीच दिया गया है.

दरअसल, लोकसभा में महिलाओं के आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक (131वां संशोधन) के पास न होने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शनिवार शाम को राष्ट्र के नाम दिए संबोधन दिया था. संबोधन के दौरान पीएम ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर महिला आरक्षण के प्रयासों की ‘भ्रूणहत्या’ करने का आरोप लगाया था. उन्होंने महिलाओं से माफी मांगी और कहा कि सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के प्रयास कभी नहीं छोड़ेगी. उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाएं कांग्रेस व उसके सहयोगियों को इस पाप की सजा जरूर देंगी.

इसके जवाब में सीपीआई(एम), टीएमसी, आरजेडी और सीपीआई जैसे दलों ने इसे प्रधानमंत्री की हार की हताशा करार दिया है. विपक्ष का कहना है कि जब सरकार ने पहले ही 16 अप्रैल 2026 के गजट नोटिफिकेशन से महिला आरक्षण को क्रियान्वित कर दिया है तो ये पूरा घटनाक्रम महज एक राजनीतिक ड्रामा है.

‘संतुलन खो चुकी है सरकार’

सीपीआई(एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने एक्स पर लिखा, ‘किसी भी प्रधानमंत्री ने कभी-भी राष्ट्र के नाम  संबोधन का इस्तेमाल इस तरह से खुले तौर पर विपक्ष की आलोचना करने और उसे निशाना बनाने के लिए नहीं किया.’

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने लोकतांत्रिक परंपरा को तोड़ने का आरोप लगाया. महिलाओं के आरक्षण विधेयक पर विपक्ष पर सीधे हमला करके और उनके कामों की तुलना ‘भ्रूण हत्या’ और ‘महिला विरोधी’ होने से करते हुए, इस संबोधन ने साफ कर दिया है कि बीजेपी संसदीय परंपराओं और नियमों को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है.

ब्रिटास ने आगे कहा, ‘ये स्पष्ट है कि कल लोकसभा में मिली करारी हार के बाद सरकार अपना संतुलन खो चुकी है.’

‘घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं पीएम’

सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने प्रधानमंत्री के संबोधन को ‘खोखला’ करार दिया. उन्होंने कहा कि पीएम ने कोई जवाबदेही तय नहीं की, बल्कि सरकार की विफलता को छिपाने के लिए गढ़ी गई कहानी को दोहराया है. ये राष्ट्र के नाम संबोधन नहीं था, बल्कि बयानबाजी के जरिए से जिम्मेदारी से बचने की कोशिश थी.

उन्होंने सरकार पर दूरदर्शन और संसद टीवी जैसे सार्वजनिक प्रसारकों का इस्तेमाल पक्षपातपूर्ण संदेशों के लिए कर के पांच राज्यों में लागू आदर्श आचार संहिता का खुलेआम दुरुपयोग करने का आरोप लगाया और इसे निंदनीय बताया.

सीपीआई (एम) नेता ने सवाल करते हुए कहा कि सरकार ने 16 अप्रैल 2026 की अपनी गजट अधिसूचना से ही महिलाओं का आरक्षण लागू कर दिया है. अगर आरक्षण पहले से मौजूद है तो ये राजनीतिक नाटक किसलिए था? आज बहाए गए घड़ियाली आंसू इस सोची-समझी साजिश को नहीं छिपा सकते.

‘BJP पर जोड़ा जाए संबोधन का खर्च’

आरजेडी राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन वास्तव में एक चुनावी भाषण प्रतीत होता है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री पद की गरिमा बनाए रखने के लिए इस भाषण पर हुए खर्च को BJP के चुनावी खर्च में शामिल किया जाना चाहिए. मनोज झा ने कहा कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल पार्टी के प्रचार के लिए करना गलत है.

टीएमसी नेता साकेत गोखले ने मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है तो इस टीवी भाषण की लागत बीजेपी के खाते में जोड़ें. उन्होंने कहा कि दो राज्यों में चुनावों के बीच मोदी का ये प्रयास दिखाता है कि वो हिल चुके हैं. गोखले ने इसे पीएम और गृह मंत्री अमित शाह के पतन की शुरुआत बताया.

‘महिलाओं को मोहरा बना रही सरकार’

सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने कहा कि ये संबोधन केवल चेहरा बचाने की एक कोशिश है. उन्होंने तर्क दिया कि महिला आरक्षण को जनगणना या परिसीमन से जोड़े बिना तुरंत लागू किया जाना चाहिए.

बेबी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी महिलाओं को अपनी कुटिल राजनीतिक रणनीति के लिए केवल मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *