बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव की मुश्किलें बढ़ गई हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
बता दें, बसपा के पूर्व विधायक के खिलाफ यह कार्रवाई विजिलेंस की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है.
मुकेश श्रीवास्तव पर एनआरएचएम घोटाले में आरोपी होने के साथ ही आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज है. ऐसे में, इसी मामले में विजिलेंस ने उन्हें 10 जून को गिरफ्तार भी किया था.
विजिलेंस की जांच में सामने आए तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू कर दी है. फिलहाल ED ये पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित तौर पर अर्जित संपत्ति और धन का सोर्स क्या था. साथ ही, एजेंसी ये भी पता लगाएगी कि इसमें मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कोई लेन-देन हुए या नहीं.
मुकेश श्रीवास्तव के भाई पर विजिलेंस का शिकंजा
बता दें, बुधवार को बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले के मुख्य आरोपी और पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव के भाई के ठिकानों पर विजिलेंस की टीम ने छापेमारी की.
यह भी पढ़ें: बसपा से निकाले जाने के बाद अब आकाश आनंद के सामने हैं ये 3 विकल्प, किस रास्ते पर जाएंगे?
विजिलेंस की अयोध्या सेक्टर की टीम ने लखनऊ और गोंडा में एक साथ कई ठिकानों पर बुधवार को कार्रवाई की. इस कार्रवाई के बाद से आरोपी के काले कारनामों की परतें खुलकर सामने आ रही हैं.
जांच में सामने आया है कि पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव का भाई अजय श्रीवास्तव एनआरएचएम घोटाले के समय बलरामपुर सीएमओ के दफ्तर में एक साधारण क्लर्क के पद पर तैनात था. लेकिन क्लर्क की नौकरी की आड़ में उसने अकूत संपत्ति बना ली.विजिलेंस की छापेमारी के दौरान इस पूर्व क्लर्क के पास से कुल अट्ठाइस करोड़ रुपये की भारी-भरकम संपत्ति का पता चला है.
अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
—- समाप्त —-
