इराक की राजधानी बगदाद में बुधवार को बड़ी संख्या में भीड़ सड़कों पर उतरी. हाथों में झंडे लिए लोग इराक से अमेरिकी सैनिकों की विदाई का जश्न मनाते दिखे. 21 साल बाद बगदाद को अमेरिकी सैनिकों ने छोड़ दिया है. उत्तरी इराक के कुर्द इलाके में स्थित इरबिल के एयरबेस से आखिरी सैन्य जत्थे की विदाई भी हो गई, लेकिन इस जश्न के साथ एक सवाल यह भी उठ रहा कि अब देश की सुरक्षा कौन संभालेगा?
दरअसल, 2003 में इराक में सद्दाम हुसैन की सरकार हटाने के लिए अमेरिका ने सैन्य अभियान शुरू किया था. इसके बाद देशभर में नागरिकों ने विरोध किया, जिससे लंबे समय तक हिंसा और अस्थिरता रही. 2011 में अमेरिकी सैनिक इराक से बाहर चले गए, लेकिन 2014 में ISIS के तेजी से उभरने के बाद फिर से उन्हें इराक लौटना पड़ा.
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इसके बाद अमेरिकी अभियान का फोकस ISIS के खिलाफ लड़ाई और इराकी सुरक्षा बलों को ट्रेनिंग देना था. 2024 में बाइडेन प्रशासन के दौरान अमेरिका और इराक के बीच सैनिकों की पूरी वापसी पर समझौता हुआ था.

अब ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को पूरा किया है. अमेरिका की सैन्य मौजूदगी खत्म हो गई है, हालांकि दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
जश्न के साथ सुरक्षा का डर
अमेरिकी सैनिकों की वापसी को कई इराकी देश की संप्रभुता और अपनी आजादी से जोड़कर देख रहे हैं. लेकिन दूसरी तरफ कई लोगों को डर है कि अमेरिकी सेना की वापसी के बाद सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ सकता है. खासकर ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों के प्रभाव के बढ़ने और ISIS के दोबारा सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है.

इसके साथ ही कुछ कुर्द अधिकारियों ने अमेरिकी सुरक्षा मौजूदगी खत्म होने के बाद संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई है. अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अब इराकी सुरक्षा बलों पर देश की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी है.
सवाल यह है कि क्या वे अकेले ISIS जैसे खतरे और देश के भीतर सक्रिय शक्तिशाली सशस्त्र गुटों से निपट पाएंगे, एक तरफ इराक के नागरिक इस विदाई को अपनी आजादी के नए दौर के रूप में देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ इराक की सुरक्षा पर अब ISIS का साया मंडरा रहा है, लेकिन लोग फिलहाल अमेरिकी सैनिकों की वापसी का जश्न मना रहे हैं.
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