काम का बहाना देकर रोका, फिर 10 मिनट बाद टीचर से.. UP में स्कूल मैनेजर गिरफ्तार – kushinagar school manager arrested molesting female teacher threats ntc apdy


कुशीनगर जिले में एक निजी स्कूल की महिला टीचर से छेड़छाड़ के आरोप में पुलिस ने स्कूल के मैनेजर को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, मैनेजर ने महिला टीचर को अपने ऑफिस में बुलाने के बाद उसके साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की.

महिला कसया थाना क्षेत्र की रहने वाली है और रविंद्र नगर थाना क्षेत्र के एक निजी स्कूल में पढ़ाती है. महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 1 अक्टूबर को स्कूल की छुट्टी के बाद वह छात्रों के साथ जाने की तैयारी कर रही थी. इसी दौरान मैनेजर दिनेश राय ने किसी काम का हवाला देते हुए उसे रोक लिया.

शिकायत के मुताबिक, करीब 10 मिनट बाद दिनेश राय महिला के पास आया और कथित तौर पर उसका हाथ पकड़कर उसके साथ छेड़छाड़ की. महिला ने आरोप लगाया कि जब उसने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे जान से मारने और शव को नहर में फेंकने की धमकी दी. उसने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने पुलिस अधिकारियों से अपने संबंध होने की बात कही. रविंद्र नगर थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि दिनेश राय के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है.

महिला की भर्ती को लेकर एलजेपी ने की आलोचना

उत्तर प्रदेश के भदोही में जिला अस्पताल में गर्भवती दलित महिला को भर्ती नहीं किए जाने को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने शनिवार को स्थानीय प्रशासन की आलोचना की. पार्टी ने कहा कि महिला को अस्पताल में भर्ती नहीं किए जाने के बाद उसे सड़क किनारे बच्चे को जन्म देना पड़ा. पार्टी ने इस घटना को ‘लापरवाही’ नहीं बल्कि  विफलता बताया.

20 वर्षीय रानी वनवासी को सोमवार को महाराजा चेत सिंह राजकीय जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने कथित तौर पर भर्ती करने से इनकार कर दिया था. डॉक्टरों ने बताया था कि वह एनीमिया से पीड़ित है और अस्पताल में खून उपलब्ध नहीं है.

इन लोगों को पाया गया था जिम्मेदार

हालांकि, रानी के परिवार ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों और एक स्टाफ नर्स ने उसकी देखभाल करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह मुसहर आदिवासी समुदाय से आती है. रानी ने मंगलवार रात अस्पताल के बाहर खुले में साथ आई महिलाओं की मदद से बच्चे को जन्म दिया. जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने चार डॉक्टरों और एक नर्स को लापरवाही का दोषी पाया था.

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