अतीक का बेटा उमर क्या 2027 में लड़ेगा चुनाव? जानिए सीट से लेकर पार्टी तक का नाम – atiq ahmad son umar 2027 election contest seat and party prayagraj muslim voters ntcpkb


उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रयागराज के चर्चित अतीक अहमद की मौत के बाद लगा था कि क्षेत्र से उनके परिवार का राजनीतिक वर्चस्व समाप्त हो गया है, लेकिन अभी भी उनके समर्थकों की पूरी फौज है. अतीक के पांच बेटों में से तीसरे बेटे असद की 2023 में मुठभेड़ में मौत और हाल ही में सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद परिवार में तीन बेटे बचे हैं.

प्रयागराज के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि जेल में बंद उमर और अली आने वाले समय में अतीक की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत हो गई, जिसे कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया. 

अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हाईकोर्ट से कस्टडी पैरोल पर आए लखनऊ जेल में बंद बड़े बेटे उमर और झांसी जेल में बंद अली अहमद की गले मिलते हुए भावुक तस्वीरें सामने आईं. दोनों भाई अपनी-अपनी जेल लौट चुके हैं, लेकिन जाने से पहले कई राजनीतिक कयास छोड़ गए हैं.

अबान के जनाजे में भारी भीड़ उमड़ी. चर्चा है कि यह भीड़ केवल अंतिम विदाई देने नहीं, बल्कि अतीक की राजनीतिक विरासत को संभालने का आग्रह करने भी पहुंची थी. इसके बाद से ही उमर के चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जाने लगी हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि उमर चुनाव लड़ते हैं, तो उनकी सीट कौन सी होगी और वे किस पार्टी के बैनर तले मैदान में उतरेंगे?

ओवैसी को भेजा पैगाम और AIMIM से जुड़ाव

उमर के चुनाव लड़ने की चर्चाएं उस समय और तेज हुईं जब जनाजे के बाद कसारी-मसारी कब्रिस्तान में उमर ने अपने छोटे भाई के जनाजे की नमाज पढ़ाई. इसके बाद जब दोनों भाई वापस लौट रहे थे, तब मस्जिद में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली से उनकी मुलाकात हुई. इस दौरान उमर और अली ने ओवैसी के लिए अपना सलाम और पैगाम भेजा.

AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने पुष्टि की है कि अतीक का परिवार आज भी AIMIM से जुड़ा हुआ है. हालांकि, चुनाव लड़ने के सवाल पर शौकत अली ने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई बात नहीं हुई है और न ही परिवार ने इस पर कोई चर्चा की है, लेकिन पार्टी अतीक परिवार के साथ खड़ी है.

AIMIM के प्रयागराज महानगर अध्यक्ष अफसर महमूद ने कहा कि यदि अतीक के परिवार से कोई चुनाव लड़ना चाहता है, तो पार्टी उसका स्वागत करेगी. उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में गुजरात जेल में बंद अतीक अहमद ने परिवार समेत AIMIM का दामन थामा था और उनकी पत्नी शाइस्ता परवीन ने लखनऊ में बाकायदा ओवैसी के मंच पर पार्टी की सदस्यता ली थी. बाद में शाइस्ता ने पार्टी छोड़ दी थी, लेकिन परिवार के अन्य लोग आज भी पार्टी से जुड़े हैं. AIMIM लीगल सेल के अध्यक्ष ओसामा नदवी ने भी कहा कि यदि परिवार से कोई चुनाव लड़ना चाहेगा, तो पार्टी उन्हें पूरा समर्थन देकर चुनाव मैदान में उतारेगी. 

पल्लवी पटेल से मुलाकात और सियासी समीकरण

सपा के टिकट पर विधायक बनीं और अपना दल (कैमरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने भी प्रयागराज पहुंचकर अतीक अहमद के परिवार से मुलाकात की. इस मुलाकात से इन चर्चाओं को बल मिला है कि क्या अतीक का परिवार 2027 की तैयारियों में जुटा है.

 हालांकि, पल्लवी पटेल ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन अतीक अहमद के डॉ. सोनेलाल पटेल से पुराने संबंध रहे हैं. इस कारण यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि अपना दल (कैमरावादी) भी अतीक के परिवार को चुनाव लड़ने का अवसर दे सकती है.

उत्तर प्रदेश में इस समय कुछ दल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अतीक के परिवार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. जनाजे के समय मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी ने भी उमर और अली से मुलाकात की थी. 

प्रयागराज पश्चिम सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा

अतीक समर्थकों की इच्छा है कि 2027 में उमर या अली में से कोई चुनाव लड़े, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख को देखते हुए फिलहाल अतीक का परिवार सीधे तौर पर कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रहा है. यही वजह है कि परिवार या संबंधित दलों की ओर से चुनाव को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

बावजूद इसके, प्रयागराज की ‘इलाहाबाद पश्चिम‘ विधानसभा सीट से अतीक के बड़े बेटे उमर अहमद के चुनाव लड़ने की चर्चा सबसे तेज है, यह सीट अतीक परिवार का पारंपरिक गढ़ और राजनीतिक लॉन्चिंग पैड रही है.

इलाहाबाद पश्चिम: अतीक परिवार की कर्मभूमि

अतीक अहमद ने 1989 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पहली बार इलाहाबाद पश्चिम सीट से चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी, इसके बाद वे 1991 और 1993 में भी इसी सीट से निर्दलीय विधायक चुने गए. बाद में उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया और 1996 में सपा के टिकट पर जीत दर्ज की. 2002 में उन्होंने अपना दल के टिकट पर पांचवीं बार इस सीट पर कब्जा जमाया.

2004 में अतीक अहमद सपा के टिकट पर फूलपुर से सांसद चुने गए, जिसके बाद उन्होंने इलाहाबाद पश्चिम सीट से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद हुए उपचुनाव में अतीक के भाई अशरफ सपा के प्रत्याशी थे, लेकिन बीएसपी के राजू पाल ने उन्हें हराकर जीत हासिल की. यह अतीक के लिए बड़ा राजनीतिक झटका था. इसके कुछ ही समय बाद राजू पाल की हत्या कर दी गई.

2005 के उपचुनाव में अशरफ जीत दर्ज करने में सफल रहे, लेकिन उसके बाद से अतीक का परिवार इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर सका है. अब 2027 में उमर अहमद के इसी पारंपरिक सीट से चुनावी मैदान में उतरने की चर्चाएं जोरों पर हैं. प्रयागराज पश्चिमी सीट का समीकरण भी उमर के लिए सियासी मुफीद माना जा रहा है. 

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