इधर पाकिस्तान बातचीत की टेबल सजा रहा था, उधर फिर लड़ पड़े US-ईरान, क्या करेंगे शहबाज-मुनीर? – America Iran War Ceasefire Peace Deal Talks Islamabad Shehbaz Sharif Asim Munir ntc mnrd


अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव शुरू हो गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने लगातार दो दिनों तक ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए. पहले दिन करीब 80 और दूसरे दिन लगभग 90 ठिकानों को निशाना बनाया गया. इन हमलों के बाद सबसे बड़ा झटका अगर किसी को लगा है तो वह पाकिस्तान है, जो खुद को दोनों देशों के बीच एक अहम मध्यस्थ के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहा था.

पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की तकनीकी वार्ता 11 जुलाई के आसपास इस्लामाबाद में हो सकती है. कतर के साथ पाकिस्तान इस बातचीत का प्रमुख मध्यस्थ माना जा रहा था. माना जा रहा था कि इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधि युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने की दिशा में आगे बढ़ेंगे.

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लेकिन हालात अचानक बदल गए. होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन कॉमर्शियल जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी. अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड सेंटर, रडार नेटवर्क, मिसाइल लॉन्च साइट और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इसके बाद ईरान ने भी कतर, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया. इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है.

पाकिस्तान की कोशिशों पर फिरा पानी

इन घटनाओं ने पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों पर भी पानी फेर दिया. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर चाहते थे कि इस्लामाबाद एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का केंद्र बने. इससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी मध्यस्थ के रूप में पहचान मिल सकती थी. हालांकि ताजा सैन्य घटना ने इस योजना को गंभीर झटका दिया है.

इससे पहले अप्रैल में भी दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में मिले थे, लेकिन बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त और दीर्घकालिक प्रतिबंध स्वीकार करे, जबकि ईरान तत्काल प्रतिबंध हटाने, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और स्थायी युद्धविराम की मांग पर अड़ा रहा.

पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच बनी थी सहमति

बाद में जून में दोनों पक्षों के बीच 14-सूत्रीय इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर सहमति बनी थी, जिसके तहत 60 दिनों के लिए अस्थायी युद्धविराम और आगे की वार्ता का रास्ता तैयार किया गया. लेकिन होर्मुज में जहाजों पर हमलों और उसके बाद अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने इस समझौते को लगभग निष्प्रभावी बना दिया.

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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी हाल ही में दोनों देशों से अपील की थी कि वे इस्लामाबाद समझौते का सम्मान करें और बातचीत जारी रखें. हालांकि मौजूदा हालात में वार्ता की संभावना बेहद कमजोर नजर आ रही है.

पहली वार्ता को लेकर पाकिस्तान में हुआ था विवाद

दिलचस्प बात यह भी है कि पाकिस्तान पहले भी अपनी मेजबानी को लेकर विवादों में घिर चुका है. अप्रैल में हुई वार्ता के दौरान इस्लामाबाद के सेरेना होटल के बिलों के भुगतान को लेकर विवाद सामने आया था, जिससे पाकिस्तान की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठे थे.

अब सवाल यह है कि क्या शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर ला पाएंगे, या फिर लगातार बढ़ते सैन्य हमलों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें अधूरी ही रह जाएंगी. फिलहाल जिस तेजी से हालात बदल रहे हैं, उससे शांति की उम्मीद पहले के मुकाबले काफी कमजोर पड़ती दिख रही है.

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