पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों एक ऐसे नाम की गूंज रहा है, जो न सिर्फ दुनिया के बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में गिने जाते हैं बल्कि बंगाल की जड़ों से भी गहराई से जुड़े हैं. प्रधानमंत्री मोदी के खास है और जाने-माने लेखक संजीव सान्याल को लेकर चर्चाएं गर्म हैं कि वे बंगाल की नई सरकार में वित्त मंत्री की कमान संभाल सकते हैं. ऑक्सफोर्ड की गलियारों से निकलकर भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाले सान्याल क्या अब बंगाल के खजाने की तस्वीर बदलेंगे? इसके बाद से लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर वह कितने पढ़े- लिखे हैं.
कौन हैं संजीव सान्याल ?
संजीव सान्याल जाने माने अर्थशास्त्री क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी सचिंद्र नाथ सान्याल के भतीजे हैं. उनका जन्म 27 अगस्त 1970 को कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में हुआ था. संजीव सान्याल का शैक्षणिक बैकग्राउंड उन्हें देश के सबसे पढ़े-लिखे अर्थशास्त्रियों की कतार में खड़ा करता है-
शुरुआती शिक्षा: उनकी शुरुआती पढ़ाई कोलकाता के प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स स्कूल और सेंट जेम्स स्कूल से हुई.
हायर एजुकेशन: उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन (BA) किया.
रोड्स स्कॉलर: वे दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप में से एक रोड्स स्कॉलरशिप (Rhodes Scholar) जीतकर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी गए, जहां से उन्होंने अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की.
बैंकिंग से लेकर सरकार के सलाहकार तक
इंटरनेशनल बैंकिंग: सरकार में आने से पहले वे ड्यूश बैंक में ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट और मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर काम कर चुके हैं.
भारत सरकार में भूमिका: वे करीब 5 सालों तक भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे और देश के आर्थिक सर्वेक्षण तैयार करने में उनकी अहम भूमिका रही. वर्तमान में वे प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्णकालिक सदस्य हैं.
लेखक और इतिहासकार: संजीव सान्याल सिर्फ अर्थशास्त्री ही नहीं बल्कि बेहद मशहूर लेखक भी हैं. उनकी किताबें जैसे “लैंड ऑफ द सेवन रिवर्स” और “रिवोल्यूशनरी” काफी चर्चा में रही हैं.
क्यों बंगाल के लिए हैं खास ?
बता दें कि अब तक बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ सिर्फ पांच मंत्रियों ने शपथ ली है. वित्त मंत्री जैसा अहम विभाग भी शुभेंदु देख रहे हैं. अब बीजेपी के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि उसके पास ऐसा कोई विधायक नहीं है जिसके पास अर्थव्यवस्था की गहरी समझ हो.
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