जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सोनी-एनहाल्ट के क्षेत्रीय चुनाव में धुर दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) बड़ी जीत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है. रविवार को मतदान के बाद सामने आए शुरुआती अनुमानों में AfD को करीब 44 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है. हालांकि पार्टी अपने दम पर सरकार बनाने के लिए जरूरी पूर्ण बहुमत हासिल कर पाएगी या नहीं, इसे लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है.
अगर AfD सरकार बनाने में सफल होती है तो यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी के किसी राज्य में पहली धुर दक्षिणपंथी सरकार होगी. पार्टी ने चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल कर अकेले सरकार बनाने का लक्ष्य रखा था. ARD और ZDF पब्लिक टेलीविजन के एग्जिट पोल और शुरुआती मतगणना पर आधारित अनुमानों के मुताबिक, AfD को करीब 44 फीसदी वोट मिल सकते हैं. यह पांच साल पहले हुए चुनाव में पार्टी को मिले वोटों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है.
वहीं, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सेंटर-राइट क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) को बड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा है. पिछले 24 वर्षों से सैक्सोनी-एनहाल्ट का नेतृत्व कर रही CDU को करीब 18.5 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है. लेफ्ट पार्टी, सोशल डेमोक्रेट्स और ग्रीन्स को करीब 9-9 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है.
‘हमने इतिहास रच दिया’
AfD की ओर से गवर्नर पद के 35 वर्षीय उम्मीदवार उलरिख सीगमंड ने नतीजों को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा, ‘हमने इतिहास रच दिया है.’ सीगमंड के मुताबिक मतदाताओं ने साफ संकेत दिया है कि चीजें इसी तरह आगे नहीं चल सकतीं. उन्होंने चांसलर मर्ज पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इस चुनाव में मर्ज ने अप्रत्यक्ष रूप से AfD के लिए अच्छे प्रचारक का काम किया. वहीं AfD की राष्ट्रीय सह-अध्यक्ष एलिस वाइडेल ने अनुमानित नतीजों को ‘सनसनीखेज’ बताते हुए दावा किया कि पार्टी को सरकार बनाने का स्पष्ट जनादेश मिला है.
सरकार बनाने की राह अभी साफ नहीं
हालांकि बड़ी जीत के बावजूद AfD के लिए सरकार बनाना आसान नहीं हो सकता. जर्मनी की मुख्यधारा की पार्टियां लंबे समय से AfD के साथ गठबंधन या राजनीतिक सहयोग से इनकार करती रही हैं. इसे जर्मन राजनीति में AfD के खिलाफ ‘फायरवॉल’ कहा जाता है. शुरुआती अनुमानों में पार्टी पूर्ण बहुमत से कुछ सीटें पीछे रह सकती है.
सैक्सोनी-एनहाल्ट में AfD की क्षेत्रीय इकाई को जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी ने ‘सिद्ध दक्षिणपंथी चरमपंथी समूह’ के रूप में वर्गीकृत किया हुआ है. हालांकि AfD चरमपंथ के आरोपों को सिरे से खारिज करती है.
AfD ने चुनाव प्रचार के दौरान अवैध प्रवासियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर निर्वासन अभियान, माइग्रेशन से जुड़े प्रोत्साहनों को खत्म करने और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी. पार्टी होम स्कूलिंग की अनुमति देने और स्कूलों में आधिकारिक तौर पर रेनबो फ्लैग फहराने पर रोक लगाने की भी वकालत करती है.
इस चुनाव के नतीजे चांसलर मर्ज के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माने जा रहे हैं. जर्मनी की मौजूदा सरकार पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था और मतदाताओं के असंतोष का सामना कर रही है.
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