पूर्व इंटेलिजेंस चीफ था 2019 ईस्टर बम धमाके का जिम्मेदार, श्रीलंका का बड़ा दावा – sri lanka easter sunday bombings ex spy chief tuan suresh sallay islamist extremist ananda wijepala ntc amkr


श्रीलंका सरकार ने पहली बार सीधे तौर पर एक पूर्व इंटेलिजेंस चीफ पर 6 साल पहले हुए विनाशकारी ‘ईस्टर संडे’ बम धमाकों की साजिश रचने का आरोप लगाया है. इन हमलों में 279 लोगों की जान गई थी.

पब्लिक सिक्योरिटी मिनिस्टर आनंदा विजेपाला ने बुधवार को संसद को बताया, जांच में पाया गया है कि सेवानिवृत्त मेजर जनरल तुआन सुरेश सल्ले ने अप्रैल 2019 में इस्लामी चरमपंथियों द्वारा किए गए हमलों की योजना बनाने और उन्हें निर्देशित करने में मुख्य भूमिका निभाई थी.

माना जा रहा है कि इस आरोप के बाद उन शीर्ष अधिकारियों पर शिकंजा और कस सकता है जो हमलों के पहले और बाद में शक्तिशाली पदों पर थे.

संसद को संबोधित करते हुए विजेपाला ने कहा कि जांचकर्ताओं ने ऐसे सबूत जुटाए हैं जो सुरेश सल्ले को सीधे तौर पर इस साजिश से जोड़ते हैं. उन्होंने कहा, ‘जांच से पता चला है कि सेवानिवृत्त मेजर जनरल तुआन सुरेश सल्ले ने इस्लामी चरमपंथियों के साथ साजिश रची और उन्हें रणनीतिक रूप से निर्देशित किया, जब तक कि उन्होंने हमले नहीं किए.’

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विजेपाला ने आगे कहा, हमले से ठीक तीन हफ्ते पहले, सल्ले ने स्थान और सभा के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए मुस्लिम पुरुषों से मुलाकात की.

279 लोगों की गई थी जान

कोऑर्डिनेटेड बम धमाकों में कोलंबो के तीन लग्जरी होटल, दो कैथोलिक चर्च और राजधानी के बाहर एक इवेंजेलिकल चर्च को निशाना बनाया गया. इन हमलों में 279 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए. यह श्रीलंका के आधुनिक इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला माना जाता है.

धमाकों में मदद करने और उकसाने के आरोपों में फरवरी में गिरफ्तार किए गए सल्ले ने हमलों में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है. सरकार के मुताबिक, उन्हें श्रीलंका के प्रिवेंशन ऑफ़ टेररिज़्म एक्ट(PTA) के तहत हिरासत में रखा गया है.

विजेपाला ने संसद को बताया कि हिरासत के दौरान भूख हड़ताल शुरू करने के बाद सल्ले को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उनकी गिरफ्तारी के बाद कोलंबो में विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए थे, जहां विपक्ष के कार्यकर्ताओं ने उनकी रिहाई की मांग की है और इस मामले को संभालने के सरकार के तरीके पर सवाल उठाए हैं.

इन नए खुलासों ने पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे की ओर भी ध्यान खींचा है. अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जांच जारी रहने तक जांचकर्ताओं ने अदालत से राजपक्षे के देश छोड़ने पर रोक लगाने का आदेश (नो-फ्लाई ऑर्डर) हासिल कर लिया है.

2019 में राजपक्षे के राष्ट्रपति बनने के बाद सल्ले का कद काफी बढ़ा था. राजपक्षे के पद संभालने के तुरंत बाद उन्हें श्रीलंका की राज्य खुफिया सेवा का प्रमुख नियुक्त किया गया था. इससे पहले वह सैन्य खुफिया अभियानों का नेतृत्व कर चुके थे.

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