पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस बिखर गई है. उनके दो-तिहाई सांसद और विधायक टूट गए हैं. इसी बीच सोमवार को कोलकाता नगर निगम (KMC) में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व सीएम ममता बनर्जी की भाभी कजरी बनर्जी और टीएमसी के कई पूर्व पार्षद शामिल हुए.
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी शामिल हुए. मुख्यमंत्री बनने के बाद कोलकाता नगर निगम में शुभेंदु अधिकारी का यह पहला आधिकारिक दौरा था. यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में हुआ है, जब एक दिन पहले ही टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया और केंद्र में एनडीए को समर्थन दे दिया.
KMC के कार्यक्रम में KMC की पूर्व अध्यक्ष और कोलकाता दक्षिण से टीएमसी सांसद माला रॉय भी शामिल थीं. माला रॉय टीएमसी की बागी सांसदों में से एक हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस कार्यक्रम में कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम भी शामिल हुए.
फिरहाद हकीम ने इस महीने की शुरुआत में मेयर पद से इस्तीफा दे दिया था. फिरहाद हकीम के इस्तीफे के कुछ दिनों बाद बंगाल सरकार ने 9 जून को टीएमसी-नियंत्रित बोर्ड को भंग कर दिया और एक एडमिनिस्ट्रेटर को नियुक्त कर दिया था.
इस कार्यक्रम में सीएम शुभेंदु अधिकारी के साथ मंच साझा करने के लिए माला रॉय, फिरहाद हकिम और पिछले टीएमसी संचालित बोर्ड से जुड़े कई नेता मौजूद थे, जबकि बीजेपी के पूर्व पार्षदों ने पूरे सभागार में सीटों पर कब्जा कर लिया था.
इस कार्यक्रम में वार्ड 73 की पूर्व पार्षद और ममता बनर्जी की भाभी कजरी बनर्जी ने कहा कि उन्हें नागरिक मुद्दों और विकास योजनाओं पर चर्चा करने के लिए बुलाया गया था. उन्होंने पत्रकारों से कहा, काउंसलर के तौर पर, हमारा जो भी थोड़ा-बहुत कार्यकाल बचा है, उसके लिए हमें बुलाया गया है ताकि विकास के काम बिना किसी रुकावट के चलते रहें. यह अच्छी बात है कि मुख्यमंत्री ने विपक्ष के सदस्यों को भी बुलाया है.
कजरी बनर्जी के अलावा, पूर्व पार्षद देबाशीष कुमार, अनन्या बनर्जी, जुई बिस्वास और असीम बोस भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए. उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी मौजूदगी का मकसद नागरिक सेवाओं को जारी रखना था, न कि किसी राजनीतिक बदलाव का संकेत देना. फिर भी, यह नजारा इसलिए खास था क्योंकि KMC को लंबे समय से TMC के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक माना जाता रहा है.
माला रॉय की मौजूदगी ने इसे और भी ज्यादा राजनीतिक महत्व दिया. KMC की पूर्व चेयरपर्सन और कोलकाता की राजनीति में TMC का एक बड़ा चेहरा रहीं रॉय अब उन बागी सांसदों के गुट का हिस्सा हैं, जिन्होंने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है. बागियों के इस फैसले की वजह से पार्टी के इतिहास में संसद के भीतर सबसे बड़ी फूट पड़ी है.
हालांकि, सोमवार का कार्यक्रम आधिकारिक तौर पर ‘स्वच्छता से स्वागत’ अभियान और शहरी प्रशासन के मुद्दों पर केंद्रित था, लेकिन कार्यक्रम की तस्वीरों से बंगाल की नई राजनीतिक हकीकत झलकती है, जहां प्रशासनिक सहयोग तेजी से बदलते विपक्षी परिदृश्य के साथ जुड़ रहा है.
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