लाल किला, जिसे कभी किला-ए-मुबारक कहा जाता था. यह मुगल साम्राज्य की सत्ता का केंद्र रहा. लगभग दो शताब्दियों तक मुगल बादशाहों यही स्थायी निवास था. शाहजहां के समय से लेकर सितंबर 1857 तक यह मुगलों के हाथ में रहा. फिर अंग्रेजों ने लाल किले पर कब्जा जमाया. चलिए जानते हैं, अंग्रेजों के कंट्रोल में आने के बाद लाल किले का इस्तेमाल किस रूप में हुआ?
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को कुचलने के लिए लाल किले पर धावा बोला. मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को गद्दी से हटा दिया. इस किले के चारों ओर उस वक्त भीषण घमासान हुआ था. भारत अलग- अलग हिस्से से आए स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों के खिलाफ गजब की एकजुटता दिखाई थी. फिर भी अंग्रेजों ने इस क्रांति को कुचल दिया.
एक वर्ष के भीतर ही ब्रिटिश राज ने ईस्ट इंडिया कंपनी की जगह ले ली. फिर यह भव्य किला एक सैन्य छावनी बन गया. किले के अंदर के बड़े हिस्से को लूटकर नष्ट कर दिया गया. इसके ऐतिहासिक आवासीय क्षेत्रों को सैनिकों के बैरकों में बदल दिया गया. ब्रिटिश राज के तहत इसे इतना मजबूत बनाया गया कि यह उनकी सैन्य शक्ति का प्रतीक बन गया.
अंग्रेजों ने कैसे किया लाल किले का इस्तेमाल
जब बहादुर शाह द्वितीय के शासनकाल में मुगल साम्राज्य का अंत हुआ. तब अंग्रेजों को इस किले से बहुमूल्य वस्तुएं लूटने का अवसर मिल गया. किले के अंदर के लगभग सभी फर्नीचर या तो नष्ट कर दिए गए या इंग्लैंड भेज दिए गए. किले के भीतर कई इमारतें और ऐतिहासिक स्थल नष्ट कर दिए गए. उनकी जगह पत्थर की बैरकें बना दी गईं.
अंग्रेजों ने लाल किले का इस्तेमाल अपने आर्मी बेस और मिलिट्री कोर्ट के तौर पर किया. इसके अंदर उनके सैनिक और बड़े मिलिट्री अफसर रहते थे. अंतिम मुगल बहादुर शाह जफर पर लाल किले में ही मुकदमा चलाया गया था. विद्रोह के एक साल बाद बादशाह बहादुर शाह ज़फर पर भी अंग्रेजों ने लाल किले के दीवान-ए-खास में ही मुकदमा चलाया था. फिर उन्हें दोषी ठहराकर बर्मा निर्वासित कर दिया.
अंग्रेजों ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के साथ-साथ इस किले का इस्तेमाल अपने पूर्व अधिकारियों के सार्वजनिक कोर्ट-मार्शल के लिए भी किया. यह किला अंदर से और बाहर से हमेशा बचा रहा. यहां तक कि नादिर शाह के हमलों से भी बचा रहा. लेकिन, अंग्रेजों ने इस पर कब्जा कर लिया और इसे काफी नुकसान पहुंचाया.
लाल किले में होता था मिलिट्री अफसरों का कोर्ट मार्शल
लाल किले में अंग्रेजों भारत की आजादी के पहले तक सैनिक अदालतें बैठाई. बहादुर शाह जफर के बाद के दूसरा प्रसिद्ध मुकदमा 1945–1946 में आजाद हिंद फौज (INA) के अधिकारियों पर चलाया गया. इस ऐतिहासिक सैन्य मुकदमे को लाल किला मुकदमा भी कहा जाता है. नवंबर 1945 में लाल किले के भीतर आजाद हिंद फौज के अधिकारियों- प्रेम सहगल, गुरबख्श सिंह ढिल्लों और शाहनवाज खान पर ब्रिटिश सेना ने कोर्ट-मार्शल का मुकदमा चलाया था.
आजादी के बाद भारतीय सेना ने लाल किले के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया. इसके बाद इसे जीर्णोद्धार के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंप दिया गया.
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