जो छात्र बचपन से अपनी कक्षा के टॉप छात्रों में रहे हों, उनके लिए किसी बड़े संस्थान में प्रवेश करना एक अलग और चुनौतीपूर्ण अनुभव हो सकता है. आईआईटी बॉम्बे की एक पूर्व छात्रा ने अपना अनुभव शेयर किया है. उन्होंने बताया कि साल 2016 में छात्रा के तौर पर IIT बॉम्बे में एडमिशन लेने के 10 साल बाद जब वह दोबरा से वह पवई कैंपस लौटीं. उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उस समय वह काफी डरी हुई महसूस करती थीं. उन्होंने कैंपस से शेयर किए गए एक वीडियो में कहा कि अपने देश में मैं शायद टॉपर होती, लेकिन यहां मैं राष्ट्रीय स्तर के टॉपर्स और बेहद बुद्धिमान लोगों के बीच थी. इतना ही नहीं इंग्लिश बोलने में भी उन्हें आत्मविश्वास की कमी महसूस होती थी और वह शैक्षणिक रूप से भी सचेत रहती थी.
उन्होंने ये भी कहा कि अब मैं खास नहीं रही…
कई होनहार छात्रों को अच्छे कॉलेज में जाने के बाद ऐसा अनुभव होता है. लेकिन उनके लिए यह भावना आगे की जिंदगी पर हावी नहीं रही.
जब पहुंची अपने कॉलेज!
वीडियो में वह आगे कहती हैं कि एक दशक बाद, पूर्व छात्रा ने बताया कि वह अपनी छात्र जीवन की कल्पना से कहीं ज्यादा बदल चुकी है. मैंने कई तरह से तरक्की की है और कई बार असफल भी हुई हूं. उनके अनुसार, ये असफलताएं छिपाने के बजाय उनके करियर और विकास का हिस्सा बन गईं. अब उन्हें अंग्रेजी में बात करने में ज्यादा आत्मविश्वास है और उन्होंने बताया कि वह पेशेवर और आर्थिक रूप से अपने कई साथियों से बेहतर कर रही हैं. खास बात यह है कि उनके वर्तमान करियर का आईआईटी बॉम्बे की पढ़ाई से ज्यादा संबंध नहीं है. मेरे वर्तमान करियर का मेरी डिग्री से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि आईआईटी के कई छात्रों के साथ ऐसा होता है.
नौकरी को लेकर भी दी सलाह
पूर्व छात्र ने युवाओं को नौकरी से जुड़ी सलाह भी दी है. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी नौकरी या सबसे ज्यादा सैलरी पाने से ज्यादा खुद की तुलना दूसरों से न करने पर थी. अपनी इस जर्नी की तुलना दूसरों से करके खुद को परेशान मत करो. तुम अपनी राह खुद अपनी गति से खोज लेंगे और हर व्यक्ति अलग होता है.
कॉलेज के बाद युवाओं पर आगे बढ़ने का दबाव बढ़ जाता है. वे नौकरी, सैलरी, प्रमोशन और कंपनियों की तुलना करने लगते हैं. लेकिन हर व्यक्ति का करियर अलग गति से आगे बढ़ता है. किसी को कॉलेज के तुरंत बाद अच्छी नौकरी मिल सकती है, जबकि किसी को सही क्षेत्र चुनने में कई साल लग सकते हैं. करियर बदलना, असफल होना या धीमी शुरुआत करना इस बात का मतलब नहीं है कि व्यक्ति पीछे रह गया है.
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