यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसे पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, स्लीपर बसों के परमिट और सुरक्षा जांच पर मांगा हलफनामा – greater noida sleeper bus fire accident ALLAHABAD high court DEMANDS DETAILS safety inspection NTC AKTW


उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत हो गई थी. इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों से स्लीपर बसों की सुरक्षा जांच और परमिट से जुड़ी जानकारी मांगी है. कोर्ट ने अधिकारियों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. यह हलफनामा 13 अक्टूबर 2026 तक दाखिल करना होगा.

जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की कोर्ट ने पूछा कि पिछले तीन साल में उत्तर प्रदेश में कितनी स्लीपर बसों को परमिट दिया गया. साथ ही यह भी बताने को कहा गया कि परमिट देने से पहले बसों में तय सुरक्षा मानकों की जांच की गई थी या नहीं.

बसों में बदलाव और सामान की भी मांगी जानकारी

कोर्ट ने बसों के डिजाइन में किए गए बदलावों की जानकारी भी मांगी है. कोर्ट ने पूछा कि क्या किसी बस में यात्रियों की सुरक्षा से समझौता करने वाले बदलाव किए गए थे. इसके अलावा स्लीपर बसों में व्यावसायिक सामान या पार्सल ले जाने की जानकारी भी मांगी गई है.

कोर्ट ने राज्य में मौजूद बॉर्डर चेकिंग प्वाइंट और रात में होने वाली बसों की जांच का ब्योरा भी मांगा है. अधिकारियों को बताना होगा कि जांच के दौरान यात्रियों के बयान दर्ज किए जाते हैं या नहीं. बसों में फायर एक्सटिंग्विशर की उपलब्धता भी जांची जाती है या नहीं, इसकी जानकारी देनी होगी.

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हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या ड्राइवर और कंडक्टर को जरूरी ट्रेनिंग दी गई है. साथ ही यह जांचने को कहा गया है कि यात्रियों को इमरजेंसी एग्जिट के बारे में जानकारी दी जाती है या नहीं. कोर्ट ने पिछले तीन साल में ऐसे हादसों से जुड़े आपराधिक मामलों की जानकारी और उनमें हुई कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा है.

कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्लीपर बसों की जांच के लिए परिवहन विभाग की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं. हालांकि, नियमित जांच को और मजबूत करने की जरूरत है.

‘बिना सही जांच के चल रही हैं AC स्लीपर बसें’

कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ AC स्लीपर बसें सही जांच और सुरक्षा इंतजामों के बिना चल रही हैं. कोर्ट ने फायर एक्सटिंग्विशर जैसे जरूरी सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता पर भी सवाल उठाया. कोर्ट ने यह भी कहा कि हादसे की स्थिति में ड्राइवर और कंडक्टर को जिम्मेदारी से काम करने के लिए पर्याप्त ट्रेनिंग होना जरूरी है.

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मामले की सुनवाई अब 13 अक्टूबर को होगी. कोर्ट का कहना है कि अगर हादसे में शामिल बस नियमों के मुताबिक नहीं पाई जाती है तो ड्राइवर, कंडक्टर और बस के लाइसेंसधारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए. जरूरत पड़ने पर लाइसेंसधारी की बसों पर रोक लगाने पर भी विचार किया जा सकता है.
 

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