शंकराचार्य ने भी दर्ज कराया केस, POSCO एक्ट में बटुकों के नाम खोलने पर उठाए सवाल – Case filed by swami avimukteshwranand in pocso court of Prayagraj batuk molestation case lcltm


उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र में दर्ज पॉक्सो प्रकरण लगातार चर्चा में बना हुआ है. एडीजे पॉक्सो कोर्ट के निर्देश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ बटुकों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है. शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने 25 फरवरी के आसपास दिए अपने बयान में कहा था कि उनके पास ऐसे ठोस साक्ष्य हैं, जिनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई संभव है.

‘क्यों उजागर की गई नाबालिग पीड़ितों की पहचान’

इसी बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट में पोक्सो एक्ट की धारा 22/23 के तहत एक वाद दायर किया गया है. दायर याचिका में कहा गया है कि दर्ज एफआईआर कथित रूप से झूठी सूचना और तथ्यों के आधार पर कराई गई है. साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि एफआईआर में नाबालिग पीड़ितों की पहचान उजागर कर दी गई, जबकि पोक्सो कानून के तहत पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करना प्रतिबंधित है. कानूनी दस्तावेजों में सामान्यतः पीड़ितों के नाम की जगह ‘X’ या ‘Y’ जैसे संकेतों का प्रयोग किया जाता है. 

आशुतोष ब्रह्मचारी ने जवाब के लिए मांगा समय

सूत्रों के अनुसार कोर्ट में यह मामला केस संख्या 125/2026 के रूप में दर्ज हुआ है. वाद दायर होने के बाद अदालत ने एफआईआर दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी से जवाब तलब किया था. बताया जा रहा है कि जवाब दाखिल करने के लिए उनकी ओर से समय मांगा गया है. अब इस प्रकरण में अगली सुनवाई 13 मार्च को निर्धारित की गई है.

मेडिकल रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि

उधर पीड़ित बटुकों की मेडिकल रिपोर्ट भी सामने आ गई है. रिपोर्ट में जो दर्ज है, वो बेहद गंभीर, चौंकाने वाला और सिहरन पैदा करने वाला है. रिपोर्ट में पीड़ित बटुकों के साथ जबरन यौन कृत्य किए जाने की पुष्टि की गई है. रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों को गंभीर बताया जा रहा है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में जबरन यौन कृत्य के संकेत दर्ज किए गए हैं.

दीक्षा के नाम पर यौन उत्पीड़न

इससे पहले दो बटुकों ने आजतक को दिए इंटरव्यू में भी आरोप दोहराए थे. उनका कहना था कि गुरु दीक्षा के नाम पर उनके साथ अनुचित व्यवहार किया जाता था और विरोध करने पर दबाव बनाया जाता था. फिलहाल मामला न्यायालय के विचाराधीन है और सभी पक्षों की दलीलों व साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.

 

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