होर्मुज ब्लॉकेड के बीच रूसी तेल की खरीद में भारी गिरावट! कमी कैसे पूरी करेगा भारत – ukraine drone attack russia tuapse refinery fire india russian oil import drop iran war hormuz closure wdrk


ईरान जंग के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने मार्च के महीने में भारी मात्रा में रूसी तेल खरीदा. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है जिस कारण खाड़ी देशों का तेल भारत तक पहुंच नहीं पा रहा था. सप्लाई की इस किल्लत को रूसी तेल ने भरपाई की और तेल की कीमतें स्थिर रहीं. लेकिन अप्रैल में रूसी तेल की खरीद में अचानक से भारी गिरावट आई है. मार्च के मुकाबले अप्रैल में रूसी तेल आयात 20% गिर गया.

रूसी तेल के आयात में भारी गिरावट की बड़ी वजह रूसी तेल ठिकानों पर यूक्रेनी हमले बताए जा रहे हैं. यूक्रेन के हमलों की वजह से रूस को अपनी कई रिफाइनरियां अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी. इससे उसका तेल निर्यात प्रभावित हुआ है.

इस बीच खबर है कि यूक्रेन के ड्रोन हमले से रूस के तुआप्से शहर स्थित तेल रिफाइनरी में एक और बड़ी आग लग गई है. काला सागर के इस बंदरगाह शहर पर दो सप्ताह से भी कम समय में यह तीसरा हमला है.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे ‘नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला’ बताया, लेकिन यूक्रेन का कहना है कि यह अभियान रूस के तेल उद्योग को नुकसान पहुंचाने और युद्ध के लिए रूस की कमाई घटाने के लिए चलाया जा रहा है, इसलिए ऐसी सुविधाएं युद्ध में वैध टार्गेट हैं.

हमलों के कारण बंद हो रही रूसी रिफाइनरियां

यूक्रेन के हमले में तुआप्से रिफाइनरी की ओर से फिर घना काला धुआं उठता देखा गया. इस रिफाइनरी की सालाना उत्पादन क्षमता करीब 1.2 करोड़ टन है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, उद्योग सूत्रों ने बताया कि 16 अप्रैल को ड्रोन हमले से बंदरगाह को हुए नुकसान के कारण रिफाइनरी ने उत्पादन रोक दिया था, क्योंकि तैयार माल भेजना संभव नहीं रहा.

तुआप्से जिले के प्रमुख सर्गेई बॉयको ने मंगलवार को रिफाइनरी के पास रहने वाले लोगों को बसों से स्थानीय स्कूल में ले जाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का आदेश दिया.

20 अप्रैल के हमले के बाद शहर और एक लोकप्रिय बीच रिसॉर्ट पर काली बारिश हुई थी, जिससे पूरे शहर में तेल जैसा चिपचिपा अवशेष जमा हो गया था. पुतिन ने तुआप्से के लिए अपने आपातकालीन मंत्री को भेजा है.

रूस के तेल ठिकानों पर यूक्रेनी हमलों का भारत पर बड़ा असर

मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से सप्लाई रुकने के बाद से मार्च में भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद तेजी से बढ़ा दी थी, लेकिन अब अप्रैल में रूसी तेल आयात बहुत अधिक घट गया है.

भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात अप्रैल में महीने-दर-महीने 20 प्रतिशत घटकर 15.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. मार्च में इसमें भारी उछाल आया था.

मार्च में रूस से भारत की तेल खरीद इसलिए बढ़ गई थी क्योंकि ईरान संघर्ष की वजह से अमेरिका ने रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट जारी की ताकि तेल की कीमतें स्थिर रहें. छूट के तहत समुद्र में उपलब्ध रूस के फ्लोटिंग कार्गो को खरीदने की इजाजत मिल गई जो अब तक जारी है.

अब नुमालीगढ़ रिफाइनरी को छोड़कर लगभग सभी भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चा तेल आयात कर रही हैं. यह जनवरी की तुलना में बड़ा बदलाव है, जब सिर्फ तीन रिफाइनरियां- इंडियन ऑयल, नायरा एनर्जी और बीपीसीएल रूसी तेल खरीद रही थीं, क्योंकि रूस के प्रमुख निर्यातकों पर अमेरिकी प्रतिबंधों ने कई खरीदारों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था.

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने फरवरी में रूस से तेल आयात दोबारा शुरू किया था.

अप्रैल में रूसी तेल आयात कम क्यों हुआ?

अप्रैल 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल आयात मार्च की तुलना में करीब 20% घटकर 15.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. यह गिरावट मुख्य रूप से तीन कारणों से हुई. सबसे बड़ा कारण रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी (वडिनार) रिफाइनरी का 35 दिन का प्लांट मेंटेनेंस शटडाउन था, जो 9 अप्रैल से शुरू हुआ.

इससे रिफाइनरी की क्रूड इनटेक क्षमता तेजी से घटी और रोजाना लगभग 2.87 लाख बैरल रूसी तेल की मांग कम हो गई.

एक और बड़ी वजह रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर यूक्रेन के हमले रहे हैं. हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस के तेल ठिकानों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया है. मार्च में यूक्रेन के हमलों से रूस के बाल्टिक सागर टर्मिनल पर लोडिंग में रुकावट आई जिससे अप्रैल में भारत में तेल सप्लाई प्रभावित रही. अमेरिकी प्रतिबंधों पर अस्थायी छूट के बावजूद ये ऑपरेशनल और लॉजिस्टिकल मुद्दे मुख्य थे.

हालांकि, राहत की बात यह है कि अब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से कच्चा तेल होर्मुज ब्लॉकेड के बावजूद भारत आने लगा है. इन दोनों देशों ने होर्मुज से इतर भारत तक तेल भेजने के लिए अलग रास्ते ऑपरेशनल कर लिए हैं.

सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए भारत को तेल भेज रहा है जबकि यूएई ADCOP पाइपलाइन से भारत को तेल भेज रहा है. इसे देखते हुए रूसी तेल की आपूर्ति में गिरावट का भारत पर ज्यादा असर देखने को नहीं मिलेगा.

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