उत्तर प्रदेश के भदोही जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां जिला अस्पताल के सामने सड़क पर एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए मजबूर होना पड़ा और उसने रात में सड़क किनारे एक बच्चे को जन्म दिया. प्रसूता का आरोप है कि जिला अस्पताल पहुंचने के बाद उसे भर्ती नहीं किया गया, जिससे वापस जाने के दौरान सड़क पर ही उसका प्रसव हो गया. अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाकर महिलाएं हंगामा करने लगी. मामला बढ़ता देख सीएमओ मौके पर पहुंचे और घर जा रही प्रसूता को बीच रास्ते से जिला अस्पताल लेकर आए और भर्ती कराया. जहां उसका उपचार चल रहा है.
दरअसल यह मामला महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल ज्ञानपुर का है. जहां वनवासी समुदाय की 20 वर्षीय गर्भवती महिला रानी अपना प्रसव कराने के लिए आई थी. इस मामले में जिला मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष चक ने बताया कि उन्हें रात 8 बजे जानकारी मिली कि गर्भवती महिला का प्रसव अस्पताल के सामने सड़क के किनारे हुआ.
महिला को था सिर्फ 5 ग्राम खून
प्रसव के बाद महिला घर चली गई थी. उन्होंने बताया कि शुरुआती जानकारी में यह बात सामने आया है कि प्रसूता सोमवार को जिला अस्पताल आई थी और जांच के दौरान उसका हीमोग्लोबिन पांच ग्राम था. जिसके कारण उसे मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल रेफर कर दिया गया था.
महिला मिर्जापुर गई थी, लेकिन वहां से लौट आई और मंगलवार को रात फिर ज्ञानपुर जिला अस्पताल आई. इस दौरान स्टाफ नर्स और डॉक्टर ने देखा लेकिन हीमोग्लोबिन पांच ग्राम होने के कारण उसे बीएचयू रेफर कर दिया गया. महिला, उसके परिजन पढ़े लिखे नहीं थे जिसके कारण वो 102 एंबुलेंस से संपर्क नहीं कर सके और अस्पताल से लौटने लगे. इस दौरान सड़क पर उसका प्रसव हो गया. उन्होंने बताया कि इस मामले की जानकारी जिलाधिकारी को हुई और उनके निर्देश पर हमारी पहली प्राथमिकता थी कि महिला को अस्पताल में भर्ती कराया जाए.
24 घंटे जांच हो जाएगी पूरी: अधिकारी
महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसे प्लाज्मा चढ़ाया जा रहा है. इस पूरे मामले की जांच 24 घंटे में पूरी हो जाएगी. इसमें जो दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी. वहीं इस घटना ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. रानी, प्रसूता ने बताया कि मेरा नाम रानी है. मैं जोरई की रहने वाली हूं. हम लोग अस्पताल में गए थे. अस्पताल वाले कहे की डिलीवरी नहीं कराएंगे.
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