संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एकमात्र न्यूक्लियर प्लांट बाराकाह पर रविवार को ड्रोन हमला हुआ. इस हमले से संयंत्र के बाहरी हिस्से में आग लग गई, हालांकि जानमाल की हानि नहीं हुई. कोई रेडियोएक्टिव रिसाव भी नहीं हुआ. यूएई ने इसे आतंकवादी हमला बताया है.
इस घटना ने ईरान और यूएई के बीच बढ़ते तनाव को फिर से सामने ला दिया है. विशेष रूप से इस हमले के समय यूएई में इजरायल की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. यूएई ने हाल के वर्षों में इजरायल के साथ संबंध काफी मजबूत किए हैं. यूएई ने इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम और कर्मियों को भी अपने यहां तैनात किया हुआ है.
यूएई एयर शो चल रहा था जिसमें इजरायल भी शामिल था. ठीक उसी समय यह ड्रोन हमला हुआ. फरवरी 28 को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद से पूरा क्षेत्र तनाव में है. यूएई इस युद्ध में इजरायल का साथ देने वाला देश माना जा रहा है, जिसकी वजह से ईरान समर्थित गुट यूएई को निशाना बना रहे हैं.
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बाराकाह परमाणु संयंत्र का महत्व
बाराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र यूएई का पहला और अरब दुनिया का एकमात्र परमाणु बिजली संयंत्र है. दक्षिण कोरिया की मदद से बनाया गया यह 20 अरब डॉलर का संयंत्र 2020 में चालू हुआ था. यह UAE की कुल बिजली जरूरत का लगभग एक चौथाई हिस्सा पूरा करता है. यूएई सात शेखडोम का संघ है जिसमें दुबई भी शामिल है.

इस संयंत्र पर हमला होने से पूरे क्षेत्र में चिंता है क्योंकि परमाणु संयंत्रों पर हमला बेहद खतरनाक हो सकता है. यूएई का परमाणु कार्यक्रम ईरान और इजरायल से पूरी तरह अलग है. यूएई ने अमेरिका के साथ 123 एग्रीमेंट किया है जिसमें उसने घरेलू स्तर पर यूरेनियम एनरिचमेंट और ईंधन को दोबारा प्रोसेस करने से मना कर दिया है.
यूएई अपना यूरेनियम विदेश से मंगाता है. वहीं ईरान यूरेनियम को हथियार स्तर के करीब संवर्धित कर रहा है. इजरायल क्षेत्र का एकमात्र परमाणु हथियार वाला देश माना जाता है. हालांकि इजरायल इसे न तो स्वीकार करता है और न ही इनकार.
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ईरान और यूएई के बीच तनाव मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर है. ईरान इस इलाके पर अपना नियंत्रण रखता है. अमेरिका ने यहां नौसैनिक ब्लॉकेड लगा रखा है. यूएई ने ईरान पर कई बार ड्रोन और मिसाइल हमलों का आरोप लगाया है. इस बार तीन ड्रोन UAE की सऊदी अरब वाली पश्चिमी सीमा से आए, जिनमें से दो को रोक लिया गया. ईरान या ईरान समर्थित इराकी शिया मिलिशिया पर शक किया जा रहा है.
ट्रंप और नेतन्याहू की बातचीत
हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा कि ईरान के लिए घड़ी बज रही है, उन्हें तेजी से आगे बढ़ना चाहिए, वरना उनमें कुछ नहीं बचेगा. इजरायल ईरान के खिलाफ संभावित नए हमलों की तैयारी में अमेरिका के साथ समन्वय कर रहा है. इजरायली कैबिनेट में नेतन्याहू ने कहा कि उनकी नजरें ईरान पर हैं.
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ईरान की तरफ से भी युद्ध की तैयारियां दिख रही हैं. ईरानी राज्य टीवी पर न्यूज एंकर राइफल लेकर बैठे नजर आए. एक महिला एंकर ने कहा कि वह देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने को तैयार है. लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के साथ इजरायल की लड़ाई भी जारी है.
परमाणु संयंत्रों पर बढ़ते खतरे
हाल के वर्षों में युद्धों में परमाणु संयंत्रों को निशाना बनाना बढ़ गया है. यूक्रेन युद्ध में रूस ने ऐसा किया, ईरान युद्ध में भी ईरान ने अपने संयंत्र पर हमले का दावा किया. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉस्ट ने यूएई हमले पर गंभीर चिंता जताई है.
यह घटना दिखाती है कि इजरायल-ईरान युद्ध अब पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रहा है. यूएई, जो पहले ईरान के साथ अच्छे संबंध रखता था, अब इजरायल के करीब आने की वजह से ईरानी खतरे का सामना कर रहा है.
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