डियर NTA,  कम से कम एक माफी तो बनती है!  – neet paper leak aspirant letter how they are feeling re neet system failure edmm


मैं 18 साल की हूं. मैंने इस साल NEET 2026 के लिए अपीयर किया था. मैंने 12वीं से ही इस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी. न सोशल मीडिया, न दोस्तों से बात, न किसी पार्टी में जाना… यहां तक कि अपने भाई-बहनों से भी ठीक से नहीं मिली. बहुत कुछ छोड़ दिया… किस लिए? हां, सिर्फ डॉक्टर बनने के लिए. अपना कर‍ियर बनाने के ल‍िए. 

जैसे-जैसे परीक्षा पास आ रही थी, वैसे-वैसे एंजाइटी बढ़ रही थी, जो शायद नॉर्मल था. फिर परीक्षा से करीब 10-12 दिन पहले NTA की वो ‘धमकी’ जैसी नोट‍िस पढ़ी, ‘ये कोई स्कूल एग्ज़ाम नहीं है, नेशनल लेवल फिल्टरेशन एग्जाम है.’

सच कहा, स्कूल एग्जाम तो बिल्कुल नहीं ही था… क्योंकि वहां कम से कम पेपर लीक तो नहीं होता. लेकिन आपका बच्चों से ये कहना कि ‘हम आपसे टेन स्टेप्स अहेड हैं.’ हां, सेंटर के बाहर हमारी चेकिंग करने में आप सच में दस कदम आगे थे. वहां बहुत सारी लेयर्स ऑफ स‍िक्योरिटी थीं. लेकिन शायद पेपर कंडक्ट कराने से पहले ये नहीं थीं. 

सेंटर पहुंची तो पता चला कि ट्रांसपेरेंट बॉटल तक अंदर नहीं ले जा सकते. कोई बात नहीं. अपने ड्रीम के ल‍िए तो कुछ भी करेंगे हमलोग. फिर भी इस गर्मी में हाल, बेहाल तो था. सेंटर के बाहर चेकिंग के वो नजारे आज भी मेरी आंखों के सामने तैर रहे हैं. जब नकल खोजने के नाम पर लड़कियों के बाल खुलवाए, उंगल‍ियों से बालों को ब‍िखराकर चेक करना, जेब होने पर टी-शर्ट और पैंट तक कट कर देना, ये सब मेरे सामने हुआ. ऐसा जैसे पेपर लीक करने वाले हम ही हैं. फिर भी इस बार भरोसा था कि शायद अब तो पेपर लीक नहीं होगा. इतनी बड़ी-बड़ी बातें और वॉर्न‍िंग्स दी गई थीं कि मन में यकीन जग गया था. 

लेकिन असल में हमारी लड़ाई स‍िर्फ NEET के सवालों से नहीं, पूरे सिस्टम से है, जो किसी के लिए झुकता नहीं, मगर जरा-सी साजिश से टूट जरूर जाता है. और बात यहीं खत्म नहीं हुई कि एनटीए का अपने ट्व‍िटर में सवाल डालना शुरू हो गया, सब सह ल‍िया क्योंकि भरोसा जो था कि इस बार कुछ नहीं होगा. मगर ये भरोसा ज्यादा दिन नहीं टिका.

इस सो-कॉल्ड “ten steps ahead” सिस्टम ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा.

चलो, एक बार फिर सबसे दूर होकर पढ़ लूंगी. फिर-से वो तलाशी के दौरान वो awkward situation फेस कर लूंगी. हमें सब आता है. लेकिन क्या आपको जरा भी अफसोस है? इतनी बड़ी-बड़ी बातें करने के बाद बस इतना कहना कि पेपर मास लेवल पर लीक हुआ है, इसलिए Re-NEET होगा. क्या आपको नहीं लगता कि हम स्टूडेंट्स से आपकी एक माफी तो बनती है. 

आपने कभी नहीं सोचा होगा कि मैंने और मेरे जैसे एस्प‍िरेंट्स ने कितने सपने बुने होंगे. पेपर होने के बाद खुश थे कि अब अपने भाई-बहनों के साथ समय बिता पाएंगे. लेकिन सिर्फ दो दिन बाद पता चला कि पेपर फिर से होगा. सारी खुश‍ियां जैसे किसी बाढ़ में घरौंदे की तरह बह गईं. 

आपको बताऊं, उस दिन मेरी छोटी बहन, जो सिर्फ 11 साल की है, मुझसे कहती है कि “आप इतनी उम्मीद मत पालो, इंड‍िया में हमारे फ्यूचर को कोई सीर‍ियसली नहीं ले रहा.’

मैं उसे क्या जवाब दूं?

क्या, ये कहूं कि सिस्टम हमारे साथ है?

वो सिस्टम जो कान में कहता है कि हमारी लड़ाई उसी से है?

वो सिस्टम, जिसका शिकार मैं खुद हो चुकी हूं?

अब समझ आता है कि इनसिक्योरिटी कहां से आती है. जब मेरे छोटे भाई-बहन कहते हैं कि इंड‍िया में पढ़ने का मन नहीं करता, तब कैसे सर उठाकर कहूं- ‘ वी आर प्राउड टू बी इन दिस कंट्री.’ जबकि आज मैं खुद सोचती हूं कि अगर ये बॉडर्स और बंदिशें न हों तो क्या मैं इस देश में रुकना चाहूंगी?

शायद नहीं, 
क्योंकि यहां सिर्फ कागजों पर ही नियम कड़े होते हैं, जमीन पर तो हमारा भरोसा हर बार तार-तार होता है. मैं भी शायद ऐसी दुनिया में रह रही होती…जहां मेहनत करने वालों की कद्र होती, न कि उन लोगों की जिन्हें सक्सेस नीट क्वेश्चन पेपर के सवालों से नहीं बल्कि लीक पेपर से मिलती है. 

सादर,
आपकी एक निराश एस्पिरेंट.

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