गाजीपुर में भर्ती टेंडर से जुड़े फर्जी दस्तावेजों के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच को कमजोर करने के आरोप में गाजीपुर कोतवाली में तैनात दो सब-इंस्पेक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. यह केस सात अलग-अलग धोखाधड़ी के मामलों से जुड़ा है, जिनमें टेंडर प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेज जमा करने का आरोप है. इस पूरे प्रकरण में विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है.
गाजीपुर कोतवाली में तैनात सब-इंस्पेक्टर रोहित कुमार और जितेंद्र कुमार उपाध्याय के खिलाफ यह कार्रवाई सोमवार को वाराणसी रेंज के डीआईजी वैभव कृष्ण ने की. डीआईजी ने दोनों पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. जांच की जिम्मेदारी गाजीपुर नगर के क्षेत्राधिकारी (सीओ) को सौंपी गई है. अधिकारियों को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.
यह मामला 25 फरवरी 2025 को दर्ज कराई गई एक शिकायत से जुड़ा है. गाजीपुर शहर के खंड शिक्षा अधिकारी ने पुलिस को शिकायत दी थी कि प्रशिक्षकों की भर्ती के लिए निकाली गई टेंडर प्रक्रिया में कई निजी फर्मों ने फर्जी दस्तावेज जमा किए हैं. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों की जांच शुरू की थी.
शिकायत के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया के टेंडर में कुल 176 फर्मों ने आवेदन किया था. जांच के दौरान इनमें से सात फर्मों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए. आरोप है कि इन फर्मों ने बैंक से जुड़े प्रमाणपत्रों समेत कई अहम दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार कर जमा किए थे. इसी आधार पर सात अलग-अलग धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए थे.
सोमवार को डीआईजी वैभव कृष्ण ने जब इन मामलों की समीक्षा की तो कई गंभीर खामियां सामने आईं. समीक्षा में पाया गया कि जिन सात फर्मों पर फर्जी दस्तावेज लगाने के आरोप थे, उन्हें बिना पर्याप्त आधार के जांच के दायरे से बाहर कर दिया गया था. अधिकारियों को यह भी संदेह हुआ कि लखनऊ की वंशिका एचआर सर्विस (Vanshika HR Service) को बचाने की कोशिश की गई.
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में गंभीर अपराध के पर्याप्त संकेत मिलने के बावजूद मामलों में जल्दबाजी में अंतिम रिपोर्ट लगाने की कोशिश की जा रही थी. इससे पूरे मामले की जांच कमजोर पड़ सकती थी और आरोपियों को फायदा मिल सकता था. समीक्षा के दौरान यह भी माना गया कि जांच की दिशा जानबूझकर प्रभावित करने का प्रयास किया गया.
डीआईजी ने अपने आदेश में कहा कि दोनों जांच अधिकारियों की भूमिका प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही और कर्तव्य में चूक की श्रेणी में आती है. इसी आधार पर दोनों सब-इंस्पेक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. फिलहाल विभागीय जांच जारी है और विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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