दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को दो हफ्ते से अधिक समय बीत गया है. इससे उनका वजन 8.2 किलो तक घट गया है. ब्लड प्रेशर भी कम हो गया है. ऐसे में उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है. अब सवाल उठता है कि आखिर इंसान बिना भोजन कितने दिन तक रह सकता है? क्या सिर्फ पानी पीने से शरीर लंबे समय तक चल सकता है. लगातार भूखे रहने से शरीर के अंदर क्या-क्या बदलाव होते हैं? कब यह जानलेवा बन सकता है.
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहता है तो इसका असर शरीर के लगभग हर अंग पर होता है. हालांकि यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि जो व्यक्ति भूखा रह रहा है उसने अपने शरीर को किस तरह से ढाल रखा है. क्या उसको फास्टिंग की प्रैक्टिस है या नहीं है. लंबे समय से भूखा रहन से शरीर पर कितना और कैसा होगा यह व्यक्ति की उम्र, वजन और पहले से मौजूद बीमारियां पर भी काफी निर्भर करता है.
भूख हड़ताल के दौरान शरीर में क्या होता है?
इस बारे में जानने के लिए आजतक. इन ने दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ सुभाष गिरी और दिल्ली सरकार के राजीव गांधी अस्पताल में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अजीत जैन से बातचीत की है.
डॉ. सुभाष बताते हैं कि हर व्यक्ति के शरीर को अपने फंक्शन करने के लिए एनर्जी की जरूरत होती है. शरीर सबसे पहले एनर्जी भोजन से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट से लेता है. लेकिन जब खाना मिलना बंद हो जाता है तो शरीर पहले लिवर में जमा ग्लाइकोजन का इस्तेमाल करता है. यह 24 घंटे तक काम करता है. इसके बाद खत्म हो जाता है. अगर 24 घंटे बाद खाना नहीं खाया तो फिर एनर्जी के लिए शरीर फैट का यूज करने लगता है. इस दौरान भोजन मिल गया तो ठीक नहीं मिला तो फिर मांसपेशियों और टिश्यू को भी एनर्जी के लिए यूज करने लगता है.
जब एनर्जी के लिए मांसपेशियों का यूज होता है तो इससे व्यक्ति का वजन लगातार घटता है, मांसपेशियां कमजोर होती हैं, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति भूख हड़ताल के दौरान सिर्फ पानी पी रहा है या फिर और कुछ भी लिक्विड ले रहा है. अगर व्यक्ति केवल पानी पी रहा है तो शरीर में यह सब प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, लेकिन अगर व्यक्ति जूस, नारियल पानी या फिर ओआरएस ले रहा है तो उनमें मौजूद पोषण एनर्जी देता है. फिर स्थिति उतनी गंभीर नहीं रहती है, लेकिन अगर व्यक्ति केवल पानी पर निर्भर है तो कुछ सप्ताह बाद हालत बिगड़ सकती है.
यह भी पढ़ें: ‘नहीं चाहता वो मर जाएं’, 15 दिन से भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक, हालत देख तड़पे 3 Idiots के ‘चतुर’, की अपील
बिना खाना खाए शरीर कितने दिन तक जीवित रह सकता है?
डॉ. सुभाष बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति भोजन और पानी दोनों पूरी तरह छोड़ दे तो एक हफ्ते के बाद ही उसकी हालत गंभीर होने लगती है. उसको डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर और कई अंगों के काम करने में दिक्कत शुरू हो सकती है. जो मौत का कारण बन सकता है. वहीं,अगर व्यक्ति साफ पानी पीता रहे और शरीर को पर्याप्त हाइड्रेशन मिलता रहे, तो एक स्वस्थ व्यक्ति 3 महीने तक या उससे ज्यादा भी जीवित रह सकता है. हालांकि यह कोई तय समय सीमा नहीं है. यह इससे अधिक और इससे काफी कम दोनों हो सकती है.
भूख हड़ताल के बाद शरीर की स्थिति कब गंभीर होगी यह हर व्यक्ति के शरीर की स्थिति, उसके वजन और दूसरी मेडिकल कंडीशन पर निर्भर करता है. अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई गंभीर बीमारी या इंफेक्शन है वह भूख हड़ताल में महीने भर के भीतर में भी दम तोड़ सकता है.
यह भी पढ़ें: 16 दिन से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक का वजन 8.2 किलो कम हुआ, 24 दिन से प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी
भूख हड़ताल पर रहने से सेहत कैसे बिगड़ना शुरू होती है
इस बारे में डॉ. अजीत जैन बताते हैं कि लंबे समय तक भूखा रहने से शरीर को ग्लूकोज नहीं मिलता है. इससे शुगर लेवल गिर सकता है. अगर ये 40 Mg/dl से नीचे चला जाता है तो यह खतरनाक होता है. खाना ना खाने की वजह से शरीर में सोडियम की कमी भी हो जाती है. इससे ब्रेन को एनर्जी नहीं मिलती है. जिससे ब्लड प्रेशर अचानक कम होने लगता है. यह अगर (90/60 mmHg) से कम हो जाए तो यह एक मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है. इसमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है. अगर सही इलाज न मिले तो मौत का रिस्क बढ़ सकता है.
डॉ जैन कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति अगर भूख हड़ताल पर है तो 15 दिन के बाद ही उसको नियमित डॉक्टरों की निगरानी में रहना चाहिए, ताकि स्थिति बिगड़ने पर तुरंत मेडिकल सहायता मिल सके
भूख हड़ताल से हुई मौतों पर क्या कहती है स्टडी
जर्नल साइंस डायरेक्ट में एक स्टडी छपी है. इसमें भूख हड़ताल से हुई तीन मौतों का जिक्र किया गया है. इसमें एक व्यक्ति 173वें दिन की भूख हड़ताल पर लो बीपी के कारण गंभीर हालत में जेल से अस्पताल लाया गया. भर्ती के लगभग एक घंटे बाद उसकी मौत हो गई. दूसरा केस 165वें दिन अस्पताल पहुंचा, उसे लो ब्लड प्रेशर (90/60 mmHg) था. उसकी हालत नहीं सुधरी और बाद में मौत हो गई. तीसरे केस को 180वें दिन अस्पताल में भर्ती कराया गया. उसको लो ब्लड प्रेशर (90/55 mmHg) था. इलाज के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. तीनों मामलों में लंबे समय तक भूख हड़ताल के कारण शरीर में लो ब्लड प्रेशर मौत का कारण बना था. तीनों मामलों में मौत भूख हड़ताल के 5 महीने के बाद हुई.
—- समाप्त —-
