भारत-कनाडा संबंधों में मिठास! जयशंकर और अनीता आनंद की मुलाकात कितनी अहम – India Canada relations improve know why the Jaishankar Anand meeting matters ntc


फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान (ASEAN) से जुड़ी बैठकों के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका, चीन, रूस, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और न्यूजीलैंड के अपने समकक्षों के साथ बातचीत की लेकिन इसमें कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ हुई उनकी बातचीत अहम मानी जा रही है. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तार से चर्चा की और साथ ही दोनों देशों के साझा लक्ष्यों और सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया. 

मनीला में आसियान (ASEAN) से जुड़ी बैठकों के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका, चीन, रूस समेत कई देशों के अपने समकक्षों से मुलाकात और बातचीत की लेकिन इन बैठकों में कनाडा की विदेश मंत्री के साथ जयशंकर की बैठक खास मानी जा रही है.

दरअसल, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने हाल ही में बयान दिया कि कनाडा में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर हत्या मामले में तफ्तीश कर रहे अधिकारियों को इस मामले में भारतीय सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता के कोई सबूत नहीं मिले हैं. ऐसे में, इस बयान के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है. इसे लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि आज दोपहर कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ हुई बातचीत की सराहना करता हूं. भारत-कनाडा सहयोग लगातार बढ़ रहा है. हमारी बातचीत हमारे प्रधानमंत्रियों द्वारा तय किए गए रिश्तों के लक्ष्यों को हासिल करने पर केंद्रित थी.

क्यों आई थी भारत-कनाडा संबंधों में खटास?

2023 में सिख अलगाववादी  हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा के एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और तब कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर इस हत्या में शामिल होने के सनसनीखेज आरोप लगाए थे. हालांकि भारत ने इन आरोपो को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेतुका बताया था. इसके बाद से ही भारत-कनाडा के संबंधों में कड़वाहट आ गई थी. बात इतनी बढ़ गई थी कि अक्टूबर 2024 में, ओटावा द्वारा निज्जर मामले से जोड़ने की कोशिश के बाद भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने हाई कमिश्नर और पांच अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया था. 

समय के साथ दोनों देशों के संबंध बिगड़ते जा रहे थे लेकिन संसदीय चुनाव में लिबरल पार्टी के नेता मार्क कार्नी की जीत के साथ हुए सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई इस मुलाकात से संबंधों में सुधार आने की उम्मीद है. मार्च में प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा के बाद से ही संबंधों में सुधार होने लगे थे और अब दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात को इसी कड़ी में देखा जा रहा है.

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