डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से शांति की उम्मीद भी, सुरक्षा की चिंता भी… दक्षिण कोरिया बोला- अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच फिर शुरू हो बातचीत – Donald trump orders reduction us south korea military drills seoul hopes us north korea talks NTC AGKP


दक्षिण कोरिया ने अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच फिर से बातचीत शुरू होने की उम्मीद जताई है. यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास को काफी कम करने का आदेश दिया. ट्रंप के इस फैसले से यह चिंता बढ़ गई है कि उत्तर कोरिया के खतरों के खिलाफ दोनों देशों की तैयारी कमजोर पड़ सकती है.

ट्रंप ने अपने इस फैसले के पीछे उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे रिश्तों का हवाला दिया. माना जा रहा है कि यह किम के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने की एक कोशिश है.

दरअसल किम जोंग उन अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास को हमले की तैयारी के तौर पर देखते हैं. लेकिन जानकारों का कहना है कि किम अब अपने बढ़ते परमाणु हथियारों और रूस के साथ बढ़ते सैन्य सहयोग की वजह से आत्मविश्वास से भरे हुए हैं. इसलिए जब तक अमेरिका से बड़ी रियायतें नहीं मिलतीं, तब तक वे बातचीत की मेज पर लौटने की संभावना कम ही रखते हैं.

सोमवार सुबह से 11 दिन का उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास तय समय पर शुरू हो गया. हालांकि यह साफ नहीं हो पाया कि इस ट्रेनिंग के किन हिस्सों में कटौती की जा रही है. ट्रंप के इस ऐलान से दक्षिण कोरिया में कई लोग हैरान रह गए, क्योंकि यह देश एशिया में अमेरिका का अहम सहयोगी है और वहां उत्तर कोरिया के परमाणु खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता मानी जाती है.

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यंग और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo: White House)

ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह सैन्य अभ्यास न सिर्फ महंगा है, बल्कि उत्तर कोरिया को गलत और आक्रामक संकेत भी देता है. उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरिया ने कोई खतरा पैदा नहीं किया और सम्मानजनक रवैया अपनाया. 

यह भी पढ़ें: किम जोंग उन से रिश्तों का हवाला, डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-साउथ कोरिया सैन्य अभ्यास घटाने का दिए आदेश

ट्रंप ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को इस अभ्यास में बड़ी कटौती करने का निर्देश दिया. उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने हाल ही में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग से पूछा था कि क्या दक्षिण कोरिया ईरान के परमाणु निरस्त्रीकरण में अमेरिका का साथ देगा, जिस पर जवाब मिला “नहीं, धन्यवाद.”

ट्रंप का यह कदम एक बार फिर दिखाता है कि वे अपने पुराने सहयोगियों से दूरी बनाकर उन नेताओं के करीब जा रहे हैं जिन्हें पहले की सरकारें विरोधी मानती थीं. ट्रंप और उनके प्रशासन के लोग नाटो सहयोगियों पर भी ईरान के खिलाफ जंग में पर्याप्त साथ न देने का आरोप लगा चुके हैं, जबकि दूसरी ओर बाल्टिक क्षेत्र में रूस की आक्रामकता का सामना करना भी जरूरी है. ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और सुरक्षा के मामले में कारोबारी सोच की वजह से कई दक्षिण कोरियाई नागरिकों का अमेरिका पर भरोसा कमजोर हुआ है.

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने सोमवार को कहा कि सरकार को उम्मीद है कि ट्रंप और किम के बीच की “दोस्ताना बातचीत” अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच सार्थक संवाद की शुरुआत करेगी. इससे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता को लेकर चर्चा शुरू हो सकेगी. 

कार्यालय ने कहा कि इसके लिए दक्षिण कोरिया जरूरी कूटनीतिक प्रयास करेगा. साथ ही, दक्षिण कोरिया और अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आजादी बहाल करने को लेकर सैन्य सहयोग पर भी बातचीत कर रहे हैं.

राष्ट्रपति ली उदारवादी नेता हैं और उत्तर कोरिया के साथ बेहतर रिश्ते चाहते हैं. पिछले साल सत्ता में आने के बाद से उनकी सरकार ने उत्तर कोरिया के साथ संबंध सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें सीमा पर लगे लाउडस्पीकर बंद करना शामिल है, जिनसे पहले के पॉप गाने और दुनिया भर की खबरें बजाई जाती थीं.

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