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Raksha Bandhan 2026: चंद्र ग्रहण या पंचक नहीं! रक्षाबंधन पर इस अशुभ घड़ी में राखी बांधने स बचें – Raksha Bandhan 2026 rakhi bandhne ka shubh muhurt kya hai rahu kaal timing Chandra grahan tvisu


रक्षाबंधन का पर्व इस बार 28 अगस्त को मनाया जाएगा. इसी दिन चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है और पंचक की शुरुआत भी हो रही है. ऐसे में लोग घबराए हुए हैं कि ऐसे अशुभ काल में वह कैसे रक्षाबंधन का त्योहार मनाएंगे. जबकि ज्योतिषाचार्य डॉ. अरुणेश कुमार शर्मा ने बताया है कि पंचक और चंद्र ग्रहण से ज्यादा प्रभाव रक्षाबंधन पर राहु काल का रहने वाला है. चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है और गुरु पंचक का कोई अशुभ प्रभाव होता नहीं है. इसलिए आपको सिर्फ राहु काल से बचना है. बाकी बताए गए मुहूर्तों में से आप सुविधानुसार कभी भी भाई को राखी बांध सकते हैं.

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए सुबह 05:57 बजे से लेकर सुबह 09:48 बजे तक रहने वाला है. बहनें इस अवधि में भाई को राखी बांध सकती हैं. इसके बाद राखी बांधने का दूसरा मुहूर्त सुबह 11.56 बजे से लेकर दोपहर 12.48 बजे तक रहने वाला है.

चंद्र ग्रहण का समय
28 अगस्त को चंद्र ग्रहण सुबह 6:53 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:32 बजे ग्रहण समाप्त होगा. ग्रहण का पीक टाइम यानी चरम अवस्था सुबह करीब 9:43 बजे बताई गई है. लेकिन यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिख रहा है. इसलिए आप बिना संकोच के शुभ मुहूर्त में भाई को राखी बांध सकती हैं.

राहुकाल में राखी बांधने से बचें
रक्षाबंधन के दिन राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्यों के लिए राहुकाल को उपयुक्त नहीं माना जाता है. इसलिए इस अवधि को छोड़ना किसी उत्तम मुहूर्त में राखी बांधना ही उचित होगा.

क्या शाम को भी बांध सकते हैं राखी?
व्यस्तता के चलते जिन लोगों के लिए सुबह या दोपहर को राखी बंधवाना संभव न हो, वो लोग संध्या काल में भी राखी बंधवा सकते हैं. शाम 06:47 बजे से शाम 07:10 बजे तक गोधुली वेला में आप राखी बंधवा सकते हैं. इसके अलावा, शाम  07:44 बजे से रात 09:23 बजे तक अमृत काल रहेगा.

रक्षाबंधन पर राखी बांधने की सही विधि क्या है?
रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले पूजा की थाली तैयार कर लें. इसमें राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल और मिठाई रखें. पूजा की शुरुआत भगवान गणेश, भगवान विष्णु और अपने इष्टदेव के पूजन से करें. इसके बाद भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर करके बैठाएं. उसके सिर पर सफेद रुमाल या कोई वस्त्र रखें. सबसे पहले भाई के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाएं और उसके ऊपर अक्षत लगाएं. इसके बाद भाई के दाहिने हाथ में कुछ पीली कौड़ी पकड़वाकर मुट्ठी बंद करवाएं और फिर कलाई पर राखी बांध दें. राखी बांधते समय ‘येन बद्धो बलिराजा…’ मंत्र का जाप करना उत्तम होता है.

राखी बांधने के बाद बहन भाई की आरती उतारे और उसके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र, सुख-समृद्धि की कामना करे. इसके बाद भाई का मुंह मिठाई से मीठा कराएं. राखी बंधने के बाद भाई अपनी बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हुए उसे उपहार भेंट करें.

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