मध्य प्रदेश में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए काफी समय बीत चुका है.स्कूलों में पढ़ाई चल रही है, बच्चे रोज कक्षाओं में पहुंच रहे हैं, लेकिन लाखों विद्यार्थियों को अब तक सरकार की ओर से मिलने वाली मुफ्त यूनिफॉर्म नहीं मिली है. पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले करीब 52 लाख बच्चे फिलहाल घर के कपड़ों में स्कूल आने को मजबूर हैं.
जिस ड्रेस का इंतजार सत्र की शुरुआत में खत्म हो जाना चाहिए था, वह अब टेंडर के विवाद में अटक गई है. सरकार ने इस बार बच्चों को दो-दो सेट तैयार यूनिफॉर्म देने का फैसला किया है. इसके लिए करीब 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. लेकिन यूनिफॉर्म की खरीद के लिए जारी टेंडर पर सवाल उठे और मामला अदालत तक पहुंच गया.
52 लाख बच्चों को मिलनी है यूनिफॉर्म
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक करीब 25.32 लाख छात्र और 26.70 लाख छात्राएं पढ़ रही हैं. योजना के तहत हर बच्चे को दो सेट यूनिफॉर्म दी जानी है. पहले सरकार बच्चों के अभिभावकों के खाते में प्रति विद्यार्थी 600 रुपये भेजती थी. उस रकम से कपड़ा खरीदकर माता-पिता अपने बच्चों के लिए यूनिफॉर्म सिलवाते थे. सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए अब तैयार यूनिफॉर्म देने का फैसला किया है.
वजह यह बताई गई कि ग्रामीण इलाकों में कई परिवारों को अच्छी गुणवत्ता का कपड़ा और सिलाई की सुविधा आसानी से नहीं मिल पाती. लेकिन नई व्यवस्था शुरू होते ही प्रक्रिया विवादों में घिर गई.
टेंडर की शर्तों पर उठे सवाल
3 जून को मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम ने करीब 350 करोड़ रुपये की यूनिफॉर्म खरीद के लिए टेंडर जारी किया. स्थानीय MSME, बुनकरों और पावरलूम से जुड़े संगठनों ने टेंडर की कुछ शर्तों पर आपत्ति जताई. आरोप है कि बड़ी वित्तीय और क्षमता संबंधी शर्तों के कारण छोटे स्थानीय निर्माता बाहर हो सकते थे. सबसे ज्यादा सवाल करीब 700 करोड़ रुपये के टर्नओवर की शर्त को लेकर उठे.
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इसके बाद टेंडर को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने टेंडर को अंतिम रूप देने पर अंतरिम रोक लगा दी. नतीजा यह हुआ कि खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और यूनिफॉर्म की सप्लाई भी रुक गई. मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म बांटने की व्यवस्था पिछले सालों में कई बार बदली है. कभी स्कूल प्रबंधन समितियों को जिम्मेदारी दी गई, कभी महिला स्व-सहायता समूहों को और कोरोना काल में सीधे खाते में राशि भेजी गई.
इसके बावजूद कई बार यूनिफॉर्म सेशन शुरू होने के महीनों बाद बच्चों तक पहुंच सकी. सरकार की प्रक्रिया और अदालत का मामला अपनी जगह है. लेकिन बच्चों का पढ़ाई का सत्र इंतजार नहीं करता. अब देखना यह होगा कि टेंडर विवाद कब सुलझता है और 52 लाख बच्चों को उनकी यूनिफॉर्म कब मिलती है.
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