गर्मी का रिकॉर्ड टूटा, यूरोप की नदियां सूखी! ये अगस्त रहा सबसे गर्म – hottest august record europe drought climate


अगस्त 2026 दुनिया का अब तक का सबसे गर्म अगस्त रहा. यूरोपीय संघ की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने दुनिया का औसत तापमान जुलाई 2023 के रिकॉर्ड के बराबर रहा. अगस्त में धरती का औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा.

इस बढ़ती गर्मी का असर यूरोप में भी साफ दिखा. जून से अगस्त 2026 की अवधि रिकॉर्ड में सबसे गर्म गर्मियों में शामिल रही और 2024 के स्तर के बराबर रही. पूरे यूरोप में 2026 की गर्मी रिकॉर्ड में तीसरी सबसे गर्म रही, जबकि पश्चिमी यूरोप में यह अब तक की सबसे गर्म गर्मी रही.

यह भी पढ़ें: 80s की फोटो के लिए AI पर बढ़ी भीड़, सर्वर से लेकर पानी तक क्या है इसका असर?

यूरोप में बारिश कम, सूखा बढ़ा

अगस्त में यूरोप के बड़े हिस्से में बारिश कम हुई. इससे जमीन में नमी कम हो गई और कई नदियों में पानी भी घट गया. फ्रांस, ब्रिटेन, हंगरी, रोमानिया और सर्बिया में गंभीर सूखे की स्थिति रही. राइन, दानुबे, सदर्न बग और ड्नीपर जैसी बड़ी नदियों में पानी का बहाव सामान्य से काफी कम रहा. 

कई इलाकों में लंबे समय तक गर्म और सूखा मौसम बना रहा. अगस्त के आखिर में कुछ जगहों पर बारिश हुई, जिससे सूखे से थोड़ी राहत मिली. वहीं, कुछ इलाकों में ज्यादा बारिश के कारण बाढ़ भी आई.

Hottest August

समुद्र भी रहा बहुत गर्म

अगस्त में एक्सट्रा-पोलर महासागरों का औसत सी सरफेस टेम्परेचर (SST) भी रिकॉर्ड स्तर पर रहा. यह मार्च 2024 के रिकॉर्ड के बराबर था. वहीं, एक्सट्रा-पोलर महासागर का रोजाना का सबसे ज्यादा SST 21.11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में भी समुद्र की सतह काफी गर्म रही. यहां अल नीनो की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है. ग्लोबल वार्मिंग के साथ समुद्र के बढ़ते तापमान का असर दुनिया के मौसम पर भी पड़ सकता है.

यह भी पढ़ें: क्या पाकिस्तान के पास हूतियों पर हमले लायक फाइटर जेट और मिसाइलें हैं?

आर्कटिक में भी कम हुई समुद्री बर्फ

अगस्त में आर्कटिक सी आइस का औसत फैलाव रिकॉर्ड में 12वां सबसे कम रहा. यानी आर्कटिक में समुद्री बर्फ का क्षेत्र सामान्य के मुकाबले काफी कम रहा. गर्मी और सूखे का असर इंडोनेशिया में जंगलों की आग पर भी पड़ रहा है. अगस्त में वहां मौसम जंगलों में मौसमी आग के और बढ़ने के लिए अनुकूल रहा.

कॉपरनिकस के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में बढ़ती गर्मी का असर अब कई जगहों पर साफ दिखाई दे रहा है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फॉसिल फ्यूल्स का इस्तेमाल कम करना, क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देना और बदलते मौसम के असर से निपटने की तैयारी करना जरूरी है.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *