UP vs MP में पढ़ाई-ल‍िखाई पर स‍ियासी लड़ाई! रिपोर्ट कार्ड में क्या कहते हैं आंकड़े – smart schools expansion up rahul gandhi chhatron ki goonj mp education politics ngix


अटल बिहारी वाजपेयी के दौर का मशहूर नारा ‘स्कूल चलें हम’ एक बार फिर देश के सियासी गलियारों में गूंज रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार लड़ाई सिर्फ साक्षरता की नहीं, बल्कि स्मार्ट क्लासेज, एआई-डिजिटल एजुकेशन और युवाओं के भविष्य की है. उत्तर प्रदेश में जहां योगी सरकार प्राथमिक शिक्षा का डिजिटल कायाकल्प करने में जुटी हुई है, वहीं, मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम के जरिए शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर केंद्र व राज्य सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे हैं.

14,429 और प्राथमिक स्कूल होंगे स्मार्ट, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के बाद अब डिजिटल क्रांति का दूसरा चरण शुरू हो चुका है. योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है.

स्मार्ट प्रोजेक्ट की मुख्य बातें-

बजट मंजूरी- शुरुआती चरण में प्रोजेक्ट के लिए 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं.

प्रति स्कूल आवंटन- हर मान्यता वाले स्कूल को स्मार्ट क्लासेज के लिए 2,07,910 रुपये की धनराशि दी जाएगी.

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर- स्मार्ट टीवी, 3D एनीमेशन कंटेंट, आईसीटी (ICT) लैब और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा मुहैया कराई जाएगी.

जिम्मेदारी- स्मार्ट क्लासेज की स्थापना का जिम्मा श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को सौंपा गया है.

उत्तर प्रदेश में पहले से ही 32,000 से अधिक बेसिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज संचालित हो रही हैं, 15,000 से अधिक स्कूलों में ICT लैब हैं और 2.61 लाख से अधिक शिक्षकों को टैबलेट दिए जा चुके हैं. हालांकि, विपक्ष ने इस 300 करोड़ रुपये के बजट पर सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस और सपा नेताओं का कहना है कि वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 11 फरवरी 2026 के बजट भाषण में ही समग्र शिक्षा के तहत इस 300 करोड़ की योजना का प्रस्ताव रख दिया था, इसलिए इसे नई उपलब्धि बताना महज एक चुनावी दांव है. 

इंदौर में राहुल गांधी की छात्रों की गूंज पर फंसा पेंच

उत्तर प्रदेश के इस डिजिटल कायाकल्प के बीच मध्य प्रदेश की सियासत इंदौर में होने वाले छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर गर्मा गई है. 19 सितंबर को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इंदौर में युवाओं और छात्रों से सीधा संवाद करने पहुंच रहे हैं. कार्यक्रम के स्थल को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस के बीच खींचतान जारी है. नेहरू स्टेडियम की जगह इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के 12,000 वर्ग मीटर मैदान पर 5 कड़ी शर्तों और 10 लाख रुपये की जमानत राशि के साथ अनुमति दी गई है.

कांग्रेस ने शिक्षा और रोजगार पर उठाए सवाल

राहुल गांधी के दौरे से ठीक पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शिक्षा व्यवस्था पर आंकड़ों की बौछार कर दी है. स्कूल ड्रॉपआउट संकट: देश में 12 करोड़ बच्चे स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते,जबकि 10 करोड़ युवा कॉलेज का मुंह तक नहीं देख पाते. देश भर में 16% शिक्षकों के पद खाली हैं. बिहार (32%), उत्तराखंड (24%), यूपी (22%) और एमपी में 19% पद खाली हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 2014-15 में देश में 11.07 लाख स्कूल थे जो घटकर 10.05 लाख रह गए हैं यानी अकेले मध्य प्रदेश में 30,650 स्कूल कम हुए हैं. इतना ही नहीं बल्कि देश में उच्च शिक्षा का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) सिर्फ 30% है और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 29% तक प्रोफेसर पद खाली पड़े हैं.

BJP ने किया पलटवार 

कांग्रेस के इन आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है.मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के इंदौर दौरे को तंज कसते हुए कहा कि मनोरंजन के लिए राहुल गांधी ही काफी हैं.वहीं, मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार का दावा है कि राज्य ने इस साल शिक्षा के लिए 45,358 करोड़ रुपये (कुल बजट का 13.7%) आवंटित किए हैं. सरकार सुपर 100 योजना, संदीपनी विद्यालय और 23 हजार छात्राओं को स्कूटी बांटने जैसी योजनाओं से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रही है. वैसे चाहे यूपी का स्मार्ट क्लासरूम मॉडल हो या मध्य प्रदेश में विपक्ष का डेटा वॉर. यह साफ है कि देश में अब पढ़ाई, क्लासरूम और नौकरियों पर सियासत का नया चैप्टर शुरू हो चुका है. 

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