सैटेलाइट तस्वीर में देखिए देश में बंटा हुआ मौसम, जानिए कहां है जाता हुआ मॉनसून – satellite image shows divide of monsoon weather india


भारत के मौसम में इन दिनों एक साफ अंतर देखने को मिल रहा है. एक तरफ मध्य, पूर्वी और दक्षिणी भारत पर घने बादल छाए हुए हैं तो दूसरी तरफ उत्तर-पश्चिम भारत में आसमान साफ है. यह तस्वीर भारत के INSAT-3DS सैटेलाइट ने 24 सितंबर को खींची है. इस तस्वीर में भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के हिस्सों तक फैला विशाल बादलों का क्षेत्र साफ नजर आ रहा है. 

यह विरोधाभास कमजोर होते डीप डिप्रेशन के साथ मेल खाता है. अवसाद जब कमजोर पड़ता है तो उसकी नमी और बादल एक दिशा में सिमट जाते हैं जबकि दूसरी तरफ मौसम खुला रह जाता है. सैटेलाइट तस्वीर ने इसी असमानता को बहुत स्पष्ट रूप से कैद किया है. आम आदमी के लिए यह समझना आसान है कि एक ही देश में इतने बड़े पैमाने पर मौसम का फर्क कैसे हो सकता है.  

INSAT-3DS के थर्मल-इन्फ्रारेड चैनल में सबसे चमकीले हिस्से ठंडे और ऊंचे बादलों को दर्शाते हैं. इनसे भारी बारिश होने की संभावना रहती है, खासकर जब कोई सक्रिय मौसमी सिस्टम उनसे जुड़ा हो.  

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तस्वीर में मध्य, पूर्वी और दक्षिणी भारत के बड़े हिस्से चमकीले दिख रहे हैं. इसका मतलब है कि वहां ऊंचे और घने बादल हैं जो बारिश ला सकते हैं. जबकि उत्तर-पश्चिम भारत अपेक्षाकृत काला या साफ नजर आ रहा है. वहां बादल कम हैं या बिल्कुल नहीं हैं. इस तरह की तस्वीर मौसम वैज्ञानिकों के लिए बहुत उपयोगी होती है क्योंकि इससे वे बारिश वाले और सूखे इलाकों का तुरंत अंदाजा लगा सकते हैं.  

डीप डिप्रेशन का प्रभाव और मौसम का बंटवारा

हाल ही में एक डीप डिप्रेशन तटीय इलाकों को प्रभावित कर चुका है. अब वह कमजोर पड़ रहा है. कमजोर होते सिस्टम की नमी और ऊर्जा पूरे देश में समान रूप से नहीं फैलती. यह अक्सर एक खास पट्टी में सिमट जाती है. इसी वजह से मध्य भारत से लेकर पूर्व और दक्षिण तक बादल छाए हुए हैं जबकि राजस्थान, पंजाब, हरियाणा जैसे उत्तर-पश्चिमी राज्यों में आसमान साफ रहने की स्थिति बनी हुई है.  

divide of monsoon weather

इस बंटवारे का सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. जिन इलाकों में घने बादल हैं वहां भारी बारिश, जलभराव या स्थानीय बाढ़ का खतरा बना रह सकता है. वहीं साफ आसमान वाले इलाकों में तापमान बढ़ सकता है और नमी कम महसूस होती है. किसान, यात्री और शहर प्रशासन सभी को इस अंतर को समझकर अपनी तैयारी करनी पड़ती है.  

INSAT-3DS जैसी सैटेलाइट प्रणाली मौसम विभाग के लिए आंख का काम करती है. जमीन पर स्थित ऑब्जरवेटरी सीमित क्षेत्र की जानकारी देती हैं लेकिन सैटेलाइट पूरे देश का एक साथ नक्शा पेश कर देता है. थर्मल-इन्फ्रारेड तस्वीर रात में भी काम आती है क्योंकि यह तापमान के आधार पर बादलों की ऊंचाई बताती है. इससे पूर्वानुमान और सटीक बनता है.  

वैज्ञानिक ऐसे चित्रों से यह भी समझते हैं कि मौसमी सिस्टम किस दिशा में बढ़ रहा है और उसकी तीव्रता कितनी है. कमजोर होते डीप डिप्रेशन के मामले में यह निगरानी इसलिए जरूरी है कि कहीं अचानक दोबारा सक्रिय न हो जाए या कोई नई प्रणाली विकसित न हो. पड़ोसी देशों तक फैले बादल क्षेत्र से क्षेत्रीय मौसम पैटर्न का भी अंदाजा लग जाता है. 

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आगे आने वाले मौसम की संभावना

जिन राज्यों में घने बादल छाए हैं वहां लोगों को आधिकारिक मौसम अलर्ट पर ध्यान देना चाहिए. निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सतर्क रहना होगा. वहीं उत्तर-पश्चिम में साफ मौसम का फायदा उठाते हुए खुले में काम करने वाले लोगों को धूप से बचाव का ध्यान रखना चाहिए.  

यह नाटकीय विभाजन हमें याद दिलाता है कि भारत का मौसम कितना विविध और जटिल है. एक ही समय में एक हिस्से में बारिश और दूसरे में सूखा जैसा मौसम आम बात है लेकिन सैटेलाइट तस्वीर इसे इतने बड़े पैमाने पर दिखाती है कि आम आदमी भी आसानी से समझ सकता है. मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और आने वाले दिनों में स्थिति के अनुसार सलाह जारी करता रहेगा.  

कुल मिलाकर INSAT-3DS की यह तस्वीर न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि आम लोगों को मौसम की असमानता समझने का सरल तरीका भी देती है. कमजोर होते अवसाद के साथ यह विभाजन अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है. इसलिए हर क्षेत्र के लोगों को अपने स्थानीय पूर्वानुमान पर नजर बनाए रखनी चाहिए.

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