आसमान में उड़ता एक यात्री विमान अचानक करीब 17 हजार फीट नीचे आ जाए. विमान में बैठे पैसेंजर आंखें बंद प्रेयर करने लगें. लगे कि अंत समय आ गया. तभी कॉकपिट का दरवाजा खुलता है. अंदर एक बहादुर पायलट लहूलुहान, और दूसरा उस पर हमला करते हुए. विमान में चीख-पुकार मच जाए. तभी कुछ यात्री अपनी जान जोखिम में डालकर कॉकपिट में घुसते हैं. एक हमलावर को पायलट को काबू करता है, दूसरा विमान का कंट्रोल सिस्टम. कुछ मिनटों के बाद विमान की लैंडिंग होती है.
यह इतना अद्भुत और रोंगेट खड़ा करने वाला वाकया है कि पहली नजर में विश्वास नहीं होता. सुनने में यह किसी हॉलीवुड फिल्म की कहानी जैसा लगता है. लेकिन 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में कुछ ऐसा ही हुआ. भारतीय कप्तान स्मित मछार पर को-पायलट हमाम अल-हमामी ने हमला किया और विमान को तबाही की तरफ ले जाने की कोशिश की.
यह किसी ज़बरदस्त एक्शन फ़िल्म के सबसे रोमांचक सीन जैसा लगता है, लेकिन अब ज़्यादातर लोग जानते हैं कि पिछले हफ़्ते तेल अवीव जा रही फ़्लाईदुबई की एक फ़्लाइट में असल में ऐसा ही हुआ था.
या क्या सच में ऐसा हुआ था? यह घटना इतनी अजीब है कि शायद यह सिर्फ एक मनगढ़ंत कहानी हो या इज़रायल की जासूसी एजेंसी मोसाद द्वारा रचा गया कोई नाटक? सोशल मीडिया पर लाखों लोग अपनी ऑनलाइन पोस्ट में यही कह रहे हैं.
कुछ यूजर तो इसे इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का प्रोडक्शन बताते हुए उसे ‘बीबीवुड’ की मूवी बता रहे हैं.
इजरायल के अखबार द टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार इंडियन हीरो पायलट या प्लेन का कंट्रोल अपने हाथ में लेने वाले आम यात्रियों के साथ लगातार मीडिया इंटरव्यू के बावजूद, हाईजैकिंग की कोशिश को लेकर तरह-तरह की साज़िश की थ्योरीज़ चल रही हैं. कुछ लोग कहते हैं कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं. कुछ का कहना है कि यह एक ‘फ़ॉल्स फ़्लैग ऑपरेशन’ था. और कई कमेंट्स में यहूदियों के प्रति नफ़रत फैलाने वाली पुरानी बातें दोहराई जा रही हैं.
कुछ लोग प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर यह आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति बचाने या गाज़ा युद्ध से लोगों का ध्यान हटाने के लिए यह साजिश रची. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह इज़रायल की ओर से खुद को पीड़ित दिखाने या दुनिया भर से सहानुभूति पाने की कोशिश थी.
टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक पर CNN की एक रिपोर्ट पर कमेंट करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, “इसे ‘बीबीवुड प्रोडक्शंस’ ने पेश किया है.”
इंस्टाग्राम पर CBS द्वारा पोस्ट किए गए उस क्लिप के नीचे एक और व्यक्ति ने लिखा, जिसमें उस को-पायलट से लड़ने वाले लोगों के इंटरव्यू दिखाए गए थे, “बस भी करो. अब तो यह सच में शर्मनाक हो गया है. जब यह खबर आई थी, तब हमने इस पर यकीन नहीं किया था; जब आपने पहली बार यह इंटरव्यू दिखाया, तब भी हमने यकीन नहीं किया था. क्लिप्स को बार-बार पोस्ट करने से कोई भी समझदार व्यक्ति इस पर यकीन नहीं करेगा.”
पिछले बुधवार को जब प्लेन को हाईजैक करने की कोशिश हो रही थी, तब ‘कॉम्बैट एंटीसेमिटिज्म मूवमेंट’ के ‘एंटीसेमिटिज्म रिसर्च सेंटर’ (ARC) ने ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं पर नज़र रखी. उन्होंने पाया कि प्लेन से पहला डिस्ट्रेस सिग्नल मिलने के सिर्फ़ 67 मिनट बाद ही पहली बार साज़िश की थ्योरी पोस्ट की गईं.
पांच घंटे के अंदर, ARC ने 1000 नफरत भरी पोस्ट रिकॉर्ड कीं और 12 घंटे बाद यह संख्या 2,963 हो गई. इन पोस्ट पर कम से कम 30,000 लाइक्स और 30 लाख (3 मिलियन) से ज़्यादा व्यूज़ आए.
CAM के CEO साशा रॉयटमैन ने कहा, “असल बात यह है कि आजकल इंटरनेट कंपनियां, खासकर Instagram और X पर, ‘फ्री-स्पीच’ की बहुत खुली पॉलिसी अपना रही हैं.” उन्होंने आगे कहा कि समस्या सिर्फ़ पोस्ट से ही नहीं है, बल्कि उन पर आने वाले कमेंट्स से भी है.
उन्होंने कहा, “वे अब जानकारी को कंट्रोल नहीं करते; वे इसे कंट्रोल करना भी नहीं चाहते.”
रॉयटमैन ने एक और बात बताई कि कुछ लोग जो शायद रूस या कतर से हो सकते हैं ने गलत जानकारी फैलाने के लिए असरदार ‘बॉट नेटवर्क’ बनाना सीख लिया है. जब सिर्फ़ 67 मिनट बाद पहली पोस्ट आई, तो उन्होंने कहा, “हमें पता था कि यह किसी इंसान ने पोस्ट नहीं किया है, क्योंकि कोई भी इतनी जल्दी ऑनलाइन जाकर पोस्ट करने की ज़हमत नहीं उठाता.”
बार-इलान यूनिवर्सिटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सीनियर लेक्चरर गैल यावेट्ज़ ने कहा कि फ्लाईदुबई की कहानी इतनी अजीब थी कि बहुत से लोग ‘इसके जवाब ढूंढने’ लगे.
यावेट्ज़ ने कहा, “जाहिर है, कुछ लोग ज़्यादा स्वाभाविक वजहों को मानेंगे, और कुछ लोग, जो ज़्यादा उग्र सोच रखते हैं, इसके लिए यहूदियों को ज़िम्मेदार ठहराएंगे.” उन्होंने बताया कि ऐसी ही साज़िश की थ्योरी गर्मियों में भी सामने आई थीं, जब जुलाई में हज़ारों मोरक्कन नागरिक स्पेन के उत्तरी अफ़्रीकी इलाके स्यूटा में बड़ी संख्या में पहुंच गए थे.
उन्होंने कहा, “जब भी कोई ऐसी बात होती है जिसे हम ठीक से समझ या समझा नहीं पाते, तो हम हमेशा उन्हीं लोगों को दोषी ठहराते हैं जिन पर अक्सर शक किया जाता है, यानी यहूदी; वे यहूदी जो दुनिया को कंट्रोल करते हैं और जिन्हें आसानी से बलि का बकरा बना दिया जाता है.”
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