स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारत के एक जहाज पर हमला हुआ है. ‘हाजी पीर’ नाम के इस जहाज पर ओमान के समुद्री तट पर ड्रोन से हमला हुआ है. ड्रोन का ये हमला इतना भीषण था कि पूरा का पूरा जहाज ही समंदर में डूब गया है. ये एक कार्गो शिप था. ईरान वॉर के दौरान भारत के शिप पर ड्रोन हमले की ये चुनिंदा घटना है. हालांकि अभी ये पता नहीं चल पाया है कि हमला किसने किया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की तीखी निंदा की है और इसे ‘अस्वीकार्य’ बताया है.
रिपोर्ट के अनुसार इस जहाज पर क्रू के 14 लोग सवार थे. ओमान की नेवी ने दावा किया है कि इन 14 लोगों को बचा लिया गया है.
मालवाहक जहाज’हाजी अली’ (MSV HAJI ALI BDI 1492) गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले का है. अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में भारतीय जहाज डूबने की ये दूसरी घटना है. अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जारी तनाव के बीच गुजरात का शिपिंग उद्योग इसका शिकार बनता दिख रहा है.
एक हफ्ता पहले ही गुजरात का जहाज ‘अल फैज नूर सुलेमानी-1’ होर्मुज स्ट्रेट में ईरान और अमेरिका के बीच हुई गोलीबारी में डूब गया.
घटना के अनुसार बुधवार 13 मई को सुबह लगभग 3:30 बजे यह जहाज सोमालिया के बरबरा से शारजाह की ओर जा रहा था, जब जहाज़ ओमान में लिमाह के पास से गुज़र रहा था तभी एक मिसाइल या ड्रोन जोरदार धमाके के साथ जहाज से टकरा गई. इस दुर्घटना के कारण जहाज में आग लग गई.
आग लगने के बाद जहाज समुद्र में डूबने लगा. जहाज को डूबते देख उस पर सवार कुल 14 सदस्यों ने तुरंत टाइम सिग्नल का इस्तेमाल करते हुए लाइफबोट्स की मदद ली और अपनी जान बचाई. ओमान कोस्ट गार्ड ने तत्काल कार्रवाई की और सभी भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया. हादसे के बाद उन्हें ओमान के दीबा बंदरगाह पर पहुंचा दिया गया है. ‘हाजी अली’ जहाज के मालिक सुल्तान अहमद संघार ने भी इस बात की पुष्टि की है कि सभी 14 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है.
अब ओमान पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि जहाज पर हमला किसने किया.
अब इन नाविकों को वापस लाने की कोशिश की जा रही है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर तीखी आपत्ति जताई है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कल ओमान के तट के पास भारतीय फ्लैग वाले जहाज पर हुआ हमला अस्वीकार्य है और हम इस बात की कड़ी निंदा करते हैं कि वाणिज्यिक जहाज़ों और नागरिक नाविकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है.
भारत दोहराता है कि कमर्शियल जहाज़ों को निशाना बनाने, निर्दोष चालक दल के सदस्यों की जान जोखिम में डालने या किसी भी तरह से नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा डालने से बचना चाहिए.
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