पांच राज्यों के चुनावी नतीजों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली एंट्री टीवीके (तमिझगा वेत्री कड़गम) की रही. पहली बार तमिलनाडु के चुनावी मैदान में उतरी इस पार्टी ने फिल्मी कहानी के हीरो की तरह एंट्री करते हुए राज्य की राजनीति में सभी को हैरान कर दिया.
यह पार्टी तमिलनाडु के सुपरस्टार विजय थलापति की है, जो राजनीति में उतरते ही तमिलनाडु के ‘बाहुबली’ बनकर उभरे. रुझानों में इस वक्त उनकी पार्टी राज्य की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आ रही है.
सोशल मीडिया पर इस समय #ThalapathyVijay ट्रेंड कर रहा है. उनकी पार्टी के अप्रत्याशित प्रदर्शन पर मीम्स की बाढ़ आ गई है, और उनकी फिल्मों के सीन भी जमकर वायरल हो रहे हैं. रुझानों को देखकर ऐसा लग रहा है कि राजनीति के मैदान में एक नया ‘स्टार’ पैदा हो चुका है. आइए देखते हैं ऐसे ही कुछ वायरल मीम्स.
थलापति का तूफान
फिल्मों में 100 करोड़ की ओपनिंग से… अब तमिलनाडु में 100 सीटों की बढ़त तक!
विजय थलापति का एक्शन पैक अवतार
तमिलनाडु का ‘धुरंधर’
भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु की राजनीति की एक खास परंपरा रही है.यहां सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं करता, बल्कि शासन भी करता है.
एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) और जयललिता जैसे सफल राजनीतिक सफर से लेकर रजनीकांत, कमल हासन, खुशबू और विजयकांत जैसे सितारों के प्रयोगों तक, इस राज्य ने बार-बार फिल्मी हस्तियों को पूर्णकालिक राजनेता बनते देखा है. एमजीआर और जयललिता तो मुख्यमंत्री भी बने.
अब तमिल सुपरस्टार सी. जोसेफ विजय, जिन्हें विजय थलापति के नाम से जाना जाता है, इस लिस्ट में शामिल होने वाले नए नाम हैं.
कब बनाई पार्टी
उन्होंने 2024 में अपनी राजनीतिक पार्टी ‘तमिझगा वेत्री कड़गम’ (TVK) लॉन्च की और जल्द ही घोषणा की कि वह राजनीति को पूरी तरह अपनाने के लिए फिल्मों से संन्यास लेंगे. उनकी आने वाली फिल्म ‘जन नायकन’ (The People’s Hero) उनकी आखिरी फिल्म होगी.विजय ने साफ कहा कि राजनीति कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जिसमें आधे मन से काम किया जाए. उनके अनुसार, तमिलनाडु के मतदाता पूरी प्रतिबद्धता के हकदार हैं और राज्य का राजनीतिक इतिहास भी इस सोच को सही ठहराता है.
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फिल्मों से बनाई अपनी छवि
विजय थलापति का स्टारडम कभी भी अचानक नहीं बना. फिल्म क्रिटिक उनके बारें में बताते हैं कि विजय थलापति का स्टारडम कभी भी अचानक नहीं बना. वे बताते हैं कि इसकी बुनियाद उनके पिता ने रखी थी, जिनके विचार वामपंथी थे और जो राजनीति में आने के इच्छुक थे.
विजय ने 1980 के दशक में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट शुरुआत की और 1992 में उनके माता-पिता फिल्ममेकर एस ए चंद्रशेखर और सिंगर-राइटर शोभा चंद्रशेखर ने उन्हें फिल्म नालाईया थीरपू से लीड एक्टर के रूप में लॉन्च किया. फिल्म भले ही फ्लॉप रही, लेकिन उनका करियर नहीं रुका.
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अगले तीन दशकों में विजय ने करीब 70 फिल्मों में काम किया और एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपनी इमेज को लगातार बदला.90 के दशक के रोमांटिक हीरो से 2000 के दशक के ‘एंग्री यंग मैन’ तक, और 2012 के बाद ‘मसीहा’ व ‘विजिलांटे’ जैसे किरदारों तक.
शुरुआती दौर में उनकी भूमिकाएं जहां ज्यादा ‘माचो’ छवि पर आधारित थीं, वहीं बाद में उन्होंने अपनी इमेज को जानबूझकर बदला. उनकी फिल्मों में सामाजिक मुद्दों की झलक दिखने लगी. ‘कथ्थी’ में किसानों की समस्या, ‘मर्सल’ में स्वास्थ्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार, बिगिल में महिला खेलों को बढ़ावा और सरकार में चुनावी गड़बड़ियों जैसे विषय सामने आए.
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