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Pithori Amavasya 2026: 10 या 11 सितंबर, पिठोरी अमावस्या कब है? नोट करें सही तिथि और मुहूर्त – Pithori Amavasya 2026 date 10 or 11 september shubh muhurt upay mantra katha 64 yogini puja vidhi tvisu


हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर पिठोरी अमावस्या का व्रत रखा जाता है. पिठोरी अमावस्या को कुशाग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है. यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना के लिए रखती हैं. इस दिन स्नान, दान, पितरों के तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान करने की परंपरा भी है. इस साल पिठोरी अमावस्या का व्रत 10 सितंबर को रखा जाएगा.

पिठोरी अमावस्या 2026 की तिथि और मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल भादो कृष्ण अमावस्या की तिथि 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे से लेकर 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे तक रहने वाली है. ऐसे में पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर को मनाई जाएगी. पिठोरी अमावस्या पर पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहू्र्त सुबह 06.07 बजे से लेकर सुबह 09.18 बजे तक रहेगा. जबकि पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए दोपहर 11.45 बजे से लेकर दोपहर 01.30 बजे तक शुभ घड़ी रहेगी.

64 देवियों की पूजा का विधान
पिठोरी अमावस्या की सबसे खास परंपराओं में 64 योगिनियों की पूजा भी शामिल है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी शक्ति के 64 विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विधान बताया गया है. दरअसल ‘पिठोरी’ शब्द आटे से बनाई जाने वाली देवी की प्रतीकात्मक आकृतियों को कहा जाता है. इस दिन महिलाएं आटे से देवी और योगिनियों की आकृतियां बनाकर उनकी पूजा करती हैं. मान्यता है कि देवी शक्ति के इन स्वरूपों की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सौभाग्य बना रहता है.

लोक मान्यताओं के अनुसार, पिठोरी अमावस्या पर 64 योगिनियों को ब्रह्मांड की रक्षक शक्तियां माना गया है. ऐसे में इनकी पूजा से संतान पर आने वाले किसी भी तरह के संकट और अकाल मृत्यु का भय टल जाता है. देवियां बच्चों को सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं.

पिठोरी अमावस्या की पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनने की परंपरा है. इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है. पितरों का स्मरण करते हुए उन्हें भी जल अर्पित किया जाता है. तर्पण के दौरान ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ मंत्र का जाप करने की परंपरा बताई गई है. इसके बाद पूजा स्थल पर दीपक जलाकर संतान के सुख और परिवार की मंगलकामना के लिए व्रत का संकल्प लिया जाता है.

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