Vastu Upay: 3 बर्नर वाला गैस चूल्हा बना देता है कंगाल! तुरंत कर लें ये उपाय – three burner gas stove in kitchen vastu tvisz


Rasoi Ghar Vastu: रसोईघर हमारे घर का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिसे मां अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है. घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और बरकत बनाए रखने के लिए रसोईघर से जुड़े उपकरणों और उनकी सही दिशा का खास ध्यान रखा जाता है. आजकल के आधुनिक समय में लोग अपनी सुविधा और परिवार की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग डिजाइन और क्षमता वाले गैस स्टोव का इस्तेमाल करते हैं. बाजार में 2, 3 और 4 बर्नर वाले गैस चूल्हे आसानी से मिल जाते हैं.

लेकिन, अक्सर लोगों के मन में यह बड़ा सवाल और भ्रम रहता है कि क्या वास्तु के अनुसार रसोईघर में 3 बर्नर (तीन चूल्हों वाला) गैस स्टोव का उपयोग करना चाहिए या नहीं? कई लोग यह सोचते हैं कि तीन की संख्या को लेकर कोई अशुभता या वास्तु दोष हो सकता है.

वास्तु शास्त्र के जानकारों के अनुसार, गैस स्टोव में कितने बर्नर होने चाहिए, इसको लेकर कोई भी सख्त या नकारात्मक नियम नहीं है. आधुनिक जीवनशैली को देखते हुए 3-बर्नर या 4-बर्नर वाले गैस स्टोव पूरी तरह से सुरक्षित, उपयोगी और वास्तु के अनुकूल माने जाते हैं. आपके चूल्हे में तीन बर्नर हों या दो, इससे वास्तु पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है. आप अपनी परिवार की आवश्यकता और सहूलियत के अनुसार किसी भी बर्नर का चूल्हा चुन सकते हैं.

दिशा का महत्व

गैस स्टोव चाहे कितने भी बर्नर का हो, उसका सही दिशा में रखा होना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. रसोई की सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए कुछ बुनियादी वास्तु नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है:

अग्नि कोण का महत्व: गैस स्टोव हमेशा रसोईघर के दक्षिण-पूर्व यानी अग्नि कोण दिशा में ही रखा जाना चाहिए. यह दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी होती है, जिससे घर में बरकत बनी रहती है.

खाना बनाते समय मुख की दिशा: चूल्हे पर खाना बनाते समय व्यक्ति का मुंह हमेशा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए. इसे बहुत शुभ और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है.

गलत दिशा से बचाव: गैस स्टोव को कभी भी रसोईघर की उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण दिशा में नहीं रखना चाहिए. इस स्थान को जल और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए यहाँ अग्नि का आना अशुभ माना गया है.

जल और अग्नि की दूरी: रसोई में पानी का सिंक और गैस स्टोव के बीच उचित दूरी होनी चाहिए. इन दोनों तत्वों को कभी भी एक-दूसरे से बिल्कुल सटाकर या आमने-सामने नहीं रखना चाहिए, क्योंकि जल और अग्नि एक-दूसरे के विरोधी स्वभाव के होते हैं.

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