इजरायल ने सीरिया के एयरबेस पर एयर स्ट्राइक की, रनवे उड़ाया – Israeli Airstrikes on Syrias Abu al Duhur Airbase in Idlib


18 अगस्त 2026 की रात सीरिया के उत्तर-पश्चिमी प्रांत इदलिब के पूर्वी इलाके में स्थित अबू अल-दुहुर सैन्य एयरबेस पर चार हवाई हमले हुए हैं. स्थानीय सीरियाई स्रोत, सोशल मीडिया अकाउंट्स और कुछ समाचार एजेंसियों ने बताया कि हमलों का मुख्य निशाना एयरबेस का रनवे था. आकाश में रोशनी वाले फ्लेयर छोड़े जाने का भी जिक्र है, जो आमतौर पर रात के ऑपरेशन में लक्ष्य को रोशन करने या निगरानी के लिए इस्तेमाल होते हैं. 

इन हमलों को इजरायली लड़ाकू विमानों द्वारा अंजाम दिया गया बताया, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में अभी यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि हमला किसने किया. अब तक इजरायल, तुर्की या सीरिया की नई सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसलिए ये खबरें अभी तक स्वतंत्र रूप से पूरी तरह पुष्ट नहीं हुई हैं. 

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अबू अल-दुहुर एयरबेस सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान महत्वपूर्ण रहा है. 2012 से 2015 तक विद्रोही ताकतों ने इसे घेरे रखा था और आखिरकार कब्जा कर लिया था. बाद में असद शासन ने इसे वापस लिया, लेकिन दिसंबर 2024 में असद शासन के पतन के बाद विद्रोही समूहों ने इसे फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया. 

फिलहाल यह बेस सीरिया की नई और सीमित वायुसेना के नियंत्रण में बताया जाता है. यहां पुराने सोवियत काल के Su-22 लड़ाकू-बमवर्षक, L-39 ट्रेनर विमान और कुछ हेलीकॉप्टर रखे गए हैं. हाल के हफ्तों में इन पुराने Su-22 विमानों के प्रशिक्षण उड़ानें भरने की खबरें आई थीं, जिससे इजरायल में चिंता जताई गई थी कि नई सीरियाई वायुसेना धीरे-धीरे अपनी क्षमताएं बढ़ा रही है.

Israeli airstrikes

रणनीतिक महत्व और संभावित उद्देश्य

इदलिब क्षेत्र तुर्की के प्रभाव क्षेत्र के करीब है और सीरिया के नए प्रशासन के लिए उत्तरी हिस्से में नियंत्रण बनाए रखने के लिहाज से अहम है. रनवे को निशाना बनाना यह संकेत देता है कि हमला करने वाली ताकत एयरबेस की परिचालन क्षमता को सीमित करना चाहती थी, ताकि विमान उड़ान न भर सकें. 

इजरायल लंबे समय से सीरिया में किसी भी सैन्य क्षमता के विकास को रोकने की नीति अपनाता रहा है, खासकर असद शासन के पतन के बाद जब उसने कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, ताकि हथियार और विमान नए प्रशासन के हाथ में पूरी तरह न जा सकें. हालिया Su-22 उड़ानों के बाद इस हमले को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में तुर्की बलों की मौजूदगी का भी जिक्र है, जिससे क्षेत्रीय जटिलताएं और बढ़ सकती हैं.

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क्षेत्रीय प्रभाव और अनिश्चितता

यह घटना मध्य पूर्व की नाजुक सुरक्षा स्थिति को और तनावपूर्ण बना सकती है. सीरिया की नई सरकार अपनी सैन्य क्षमताएं फिर से खड़ी करने की कोशिश कर रही है, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा रेखा बनाए रखना चाहता है. तुर्की की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि वह इदलिब में प्रभाव रखता है. 

फिलहाल नुकसान का पूरा आकलन उपलब्ध नहीं है. न ही किसी बड़े हताहत की पुष्टि हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आधिकारिक पुष्टि या सैटेलाइट चित्र नहीं आते, तब तक पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होगी. यह घटना दिखाती है कि असद के बाद के सीरिया में भी बाहरी शक्तियां सक्रिय रूप से सैन्य संतुलन प्रभावित कर रही हैं.

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