कर्नाटक में तुलु भाषा को मिली मान्यता, CM शिवकुमार ने पूरा किया बीजेपी का वादा – tulu official language karnataka dk shivakumar bjp promise congress ntc amkr


सदियों से कर्नाटक के तटीय इलाकों में तुलु भाषा बोली जाती रही है और यह लोक-कथाओं, थिएटर, रीति-रिवाजों और रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा रही है. फिर भी, इतनी गहरी सांस्कृतिक मौजूदगी के बावजूद, यह भाषा राज्य की आधिकारिक भाषाओं के दायरे से बाहर थी.

शुक्रवार को मंगलुरु में पहली बार हुई कर्नाटक कैबिनेट की बैठक में तुलु को राज्य की दूसरी अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का फैसला किया गया. 

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उस वादे को पूरा किया जो BJP ने लगभग दो दशक पहले अपने वोटरों से किया था. यह फैसला तटीय कर्नाटक की सबसे पुरानी मांगों में से एक को पूरा करता है और BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व CM बीएस येदियुरप्पा द्वारा 2008 में किए गए वादे को भी पूरा करता है.

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तुलु तटीय कर्नाटक में बोली जाती है, एक ऐसा इलाका जहां BJP का दशकों से चुनावी दबदबा रहा है.  दक्षिण कन्नड़ और उडुपी में BJP के बार-बार चुनावी दबदबे और कर्नाटक में उसकी सरकारों के बावजूद, तुलु को आधिकारिक मान्यता देने की मांग अधूरी ही रही थी. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने आखिरकार इसे पूरा कर दिया है.

यह फैसला कैबिनेट बैठक में घोषित एक बड़े पैकेज का हिस्सा था, जिसका मकसद तटीय इलाके की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करना था. तुलु को मान्यता देने के साथ-साथ, सरकार ने दक्षिण कन्नड़ जिले का नाम बदलकर मंगलुरु जिला करने के लिए आपत्तियां और सुझाव मांगने वाली एक ड्राफ्ट अधिसूचना जारी करने का फैसला किया.

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