राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने रामभक्तों के नाम एक खुला पत्र जारी कर कहा है कि ‘चढ़ावा चोरी महापाप है’ और इस मामले में कोई भी दोषी बचेगा नहीं. उन्होंने कहा है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए. पत्र में गोविंद देव गिरि ने कहा कि लगभग पांच शताब्दियों के संघर्ष, संतों के बलिदान और रामभक्तों के प्रयासों के बाद अयोध्या में भगवान रामलला का भव्य मंदिर बना.
उन्होंने कहा कि ऐसे पवित्र और आनंदमय वातावरण में मंदिर में आर्थिक गड़बड़ी और चढ़ावे की चोरी की घटना ने सभी रामभक्तों को आहत और शर्मिंदा किया है. अपने पत्र में गोविंद देव गिरि ने लिखा,’रामलला की हुंडी में श्रद्धापूर्वक समर्पित धनराशि की गिनती के दौरान चोरी करने का जघन्य महापाप कुछ लोगों ने किया. यह भी सामने आया है कि चढ़ावा चोरी का यह क्रम काफी समय से चल रहा था. इससे हम अत्यंत दुखी और लज्जित हैं.’
गोविंद देव गिरि ने अपने ऊपर लग रहे सवालों को लेकर भी सफाई दी और कहा कि उन्होंने कभी ट्रस्ट में किसी पद के लिए प्रयास नहीं किया और राम सेवा को केवल प्रभु की कृपा मानते हैं. उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के काम से वह हर महीने या डेढ़ महीने में अयोध्या आते हैं, लेकिन यात्रा और ठहरने का खर्च कभी ट्रस्ट से नहीं लेते और खुद उठाते हैं. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के कोष से होने वाले आय-व्यय का पूरा ऑडिट रिकॉर्ड सुरक्षित है और अधिकृत व्यक्ति कभी भी उसकी जांच कर सकते हैं.
गोविंद देव गिरि ने बताया कि पुणे स्थित उनके कार्यालय के चार्टर्ड अकाउंटेंट नियमित रूप से अयोध्या जाकर राम मंदिर ट्रस्ट के कोष की वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करते हैं और ट्रस्ट कार्यालय को जरूरी मार्गदर्शन देते हैं. राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी व्यक्ति से मंदिर के लिए नकद दान स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि केवल दो अपवाद रहे- एक उनकी दिवंगत बड़ी बहन द्वारा दिए गए 11 हजार रुपये और दूसरा एक श्रद्धालु द्वारा दी गई चांदी की ईंट, जिसकी रसीद तुरंत जारी कर दी गई थी.
गोविंद देव ने यह भी कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के सभी भुगतान सीधे बैंक ट्रांसफर से होते हैं और उनके पास कोई चेकबुक या भुगतान संबंधी हस्ताक्षर अधिकार नहीं हैं. उन्होंने दावा किया कि चढ़ावा गिनने वाली व्यवस्था से उनका कभी प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा और यह जिम्मेदारी स्थानीय ट्रस्टियों द्वारा संभाली जाती रही है. गोविंद देव गिरि ने कहा कि चोरी कितनी हुई, कब हुई और कैसे हुई, यह जांच का विषय है. उन्होंने एसआईटी और पुलिस जांच पर भरोसा जताते हुए कहा, ‘दोषी बचेंगे नहीं. अपराधी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, नाम और पद देखे बिना उसे न्यायालय से कठोर दंड मिलना चाहिए.’
उन्होंने ट्रस्ट के अन्य सदस्यों से भविष्य में अधिक सतर्क और अभेद्य व्यवस्था बनाने की अपील की. गोविंद देव ने कहा कि विशेषज्ञों की सलाह लेकर ऐसी प्रणाली तैयार की जानी चाहिए, जिसमें दानपात्र में आने वाली राशि की गिनती में पूरी पारदर्शिता और कड़ी निगरानी सुनिश्चित हो. अपने पत्र के अंत में उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की कृपा से संशय के बादल छटेंगे और अपराध का अंधकार दूर होगा. गोविंद देव गिरि ने भरोसा जताया कि रामलला का मंदिर भविष्य में दुनिया के लिए आदर्श मंदिर बनेगा. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और राम मंदिर की गरिमा को धूमिल करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा.
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