प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया वाराणसी दौरे के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद की बैरिकेडिंग से सटी दीवार पर की गई गेरुआ रंग की वारली पेंटिंग ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान विरोध की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने ज्ञानवापी और विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 पर भारी पुलिस बल, PAC और RRF तैनात कर दी थी. हालांकि, नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है.
दरअसल, 29 अप्रैल को पीएम मोदी के विश्वनाथ धाम आगमन के मद्देनजर, मंदिर के रास्ते और मस्जिद की बैरिकेडिंग से लगी करीब डेढ़-दो फीट ऊंची दीवार को खूबसूरती के लिए गेरुआ रंग से पेंट किया गया था और उस पर सांस्कृतिक ‘वारली’ डिजाइन उकेरी गई थी. मुस्लिम समाज और मस्जिद कमेटी का दावा है कि यह दीवार वक्फ की संपत्ति है और उनकी अनुमति के बिना उनके धर्म के विरुद्ध रंग और चित्रकारी की गई है.
पीएम मोदी ने अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन सुबह वाराणसी के विश्वनाथ धाम पहुंचकर 55 मिनट गुजारा था. जिस दौरान उन्होंने न केवल बाबा विश्वनाथ का षोडशोपचार तरीके से पूजन किया था और गेट नंबर 4 से मंदिर तक भी वे गुजरे थे. जिसके बीच में ज्ञानवापी मस्जिद भी पड़ता है. उसी मस्जिद की लगभग डेढ-दो फीट ऊंची मस्जिद की बेरिकेडिंग से लगी दीवार को भी खूबसूरती के लिए गेरूआ रंग से पेंट करके उसपर वारली डिजाइन उकेरा गया था.
अचानक तैनात की गई फोर्स
जैसे ही इसकी जानकारी मुस्लिम समाज को हुई वैसे ही आज जुमे की नमाज के दौरान इसपर विरोध जाहिर करने की आशंका होने लगी. फिर क्या था? भारी संख्या में पुलिस, PAC और RRF तैनात कर दी गई. काशी जोन के सभी सर्किल और थानों से भी भारी संख्या में पुलिस टीम आ गई और पुलिस लाइन से भी फोर्स बुला ली गई. लेकिन नमाज खत्म होते ही किसी ने विरोध-प्रदर्शन नहीं किया. लेकिन खास बातचीत के दौरान नमाजियों ने बताया कि जो जैसा था उसे छेड़ने की जरूरत नहीं थी. इससे गंगा-जमुनी तहजीब पर असर पड़ता है.
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वाराणसी के मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने बताया कि हमारी जमीन पर गेरूआ रंग लगाया गया और उसमें चित्र भी बनाए गए. जो हमारे लिए आपत्तिजनक है. हमने एक हफ्ते तक लगातार बड़े अधिकारियों से बात किया और हटवाने के लिए भी कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. आज दुबारा भी लिखित रूप से बड़े अधिकारी से मिलकर हटवाने के लिए कहा गया है. जिसपर आश्वासन दिया गया है. इस मामले में मंडलायुक्त से भी मुलाकात करेंगे और हटाने की भी मांग करेंगे.
उन्होंने विरोध के सवाल पर बताया कि मेरी जमीन और मेरा प्लाट है और मेरी प्रापर्टी है. बगैर मस्जिद कमेटी की सहमति और इजाज़त के नया काम नहीं होना चाहिए. उन्होंने साफ किया कि तकरीर में विरोध नहीं, लेकिन लिखित विरोध किया गया अधिकारियों को पत्र देकर. उन्होंने अधिकारियों की दलील कि ये सांस्कृतिक चित्रकारी है पर जवाब दिया कि जो चाहे वे बनाए, लेकिन हमारी जमीन पर नहीं.
वहीं DCP काशी गौरव बंसवाल ने बताया कि कोई भी आपत्तिजनक तस्वीर नहीं बनाई गई है. बनाई गई तस्वीरें सांस्कृतिक तस्वीर है न कि आपत्तिजनक. विरोध के एलान पर कार्रवाई भी की जाएगी. उन्होंने बताया कि तस्वीर मस्जिद के दायरे के बाहर बनाई गई है. उन्होंने साफ किया कि सड़क पर उतरकर कोई कानून हाथ में लेगा तो कार्रवाई होगी और अभी भी तस्वीर वही बनी हुई है और ये मंदिर का विषय है. जिसपर मंदिर प्रशासन निर्णय लेगा.
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