इजरायल और हमास के बीच गाजा विवाद सुलझता नहीं दिख रहा. गाजा से सेना वापस बुलाने को लेकर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शर्त रख दी है. नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि जब तक हमास पूरी तरह से हथियार नहीं छोड़ देता, तब तक इजरायल गाजा में अपनी मौजूदा स्थिति से पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित हालिया समझौते पर भी असहमति जताई.
नेतन्याहू की इन टिप्पणियों ने हमास के निशस्त्रीकरण (हथियार छोड़ने) के समझौते पर और संदेह पैदा कर दिया है, जिसे युद्ध खत्म करने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा था. इससे ट्रंप प्रशासन के साथ मतभेद भी सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं.
इस समझौते में हमास से हथियार छोड़ने की प्रक्रिया शुरू करने और इजरायल से हमले रोकने व गाजा के उस लगभग 60 प्रतिशत हिस्से से पीछे हटने की बात कही गई थी, जिस पर अभी उसका नियंत्रण है.
यह समझौता अक्टूबर में हुए संघर्ष-विराम समझौते पर आधारित था, जिसने बड़े सैन्य अभियानों को खत्म किया और गाजा में बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित की थी, लेकिन अन्य मोर्चों पर यह प्रक्रिया रुक गई थी.
अब नेतन्याहू ने अपनी बात दोहराई कि निशस्त्रीकरण सबसे पहले होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इजरायली सेनाएं ‘अपनी, अपने क्षेत्र और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करती रहेंगी.’
सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में नेतन्याहू ने कहा, ट्रंप प्रशासन ने हमें एक ड्राफ्ट भेजा था. हम उससे सहमत नहीं थे. यह हमारा ड्राफ्ट नहीं है. हमने अपनी टिप्पणियां भेजीं. यही हमारा रुख है.
बता दें कि बीते हफ्ते ही ट्रंप ने ऐलान किया था कि इजरायल गाजा से अपनी सेना वापस बुलाएगा. उन्होंने इसे बोर्ड ऑफ पीस की कामयाबी बताया था.
तीन साल में 73,377 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए
बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद ताजा झगड़ा शुरू हुआ था. तब दक्षिणी इजरायल पर हमास के नेतृत्व वाले चरमपंथी हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इजरायल की जवाबी कार्रवाई में 73,377 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं.
गाजा के मुताबिक, फिलहाल भी घातक हमले जारी हैं और पुनर्निर्माण रुका हुआ है. इलाके के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के बाद से गाजा में कम से कम 1,252 लोग मारे गए हैं.
इजरायल का कहना है कि उसके हमले उन चरमपंथियों के खिलाफ हैं जो उसके सैनिकों को खतरे में डालते हैं, जिन्होंने 7 अक्टूबर के हमले में भाग लिया था या अन्य उल्लंघन करते हैं. युद्धविराम के बाद से पांच इजरायली सैनिक मारे गए हैं.
पिछले साल अक्टूबर में हुए अमेरिका-समर्थित युद्धविराम समझौते में हमास के निशस्त्रीकरण और इजरायल की वापसी की बात कही गई थी. एक अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता बल तैनात किया जाना था, और एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी प्रशासन को शासन और पुनर्निर्माण की देखरेख करनी थी.
इजरायल का कहना है कि सब कुछ हमास द्वारा हथियार छोड़ने पर निर्भर करता है, जबकि हमास का कहना है कि इज़राइल को अपने हमले बंद करने चाहिए और इलाके से पीछे हटना शुरू करना चाहिए. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं.
ताजा हाल की बात करें तो गाजा का ज्यादातर हिस्सा बर्बाद हो चुका है. यहां के 20 लाख फिलिस्तीनियों में से ज्यादातर लोग बेघर हो गए हैं. कई लोग टेंट कैंपों में रह रहे हैं, जहां खराब हालात और भीड़भाड़ की वजह से चूहों का आतंक और चिकनपॉक्स जैसी संक्रामक बीमारियां फैल गई हैं.
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