फर्जी रिपोर्ट के लिए ₹10 लाख की घूस! पंजाब CM वीडियो केस में बड़ा धमाका… गुरुग्राम में 2 गिरफ्तार – punjab cm bhagwant mann video case gurugram fir forensic report controversy accused arrested NTC AGKP


पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े वायरल वीडियो मामले में अब नया मोड़ आया है. गुरुग्राम पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है और एक एफआईआर दर्ज की है. आरोप है कि कुछ लोगों ने मिलकर ऐसी फॉरेंसिक रिपोर्ट बनवाने की साजिश की जो मुख्यमंत्री के पक्ष में जाए. यह मामला धार्मिक और राजनीतिक तौर पर बहुत संवेदनशील बन गया है.

कुछ समय पहले एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक शख्स को मान जैसा दिखाया गया था. वीडियो में सिख गुरुओं और भिंडरावाले की तस्वीरों के साथ कुछ आपत्तिजनक हरकतें दिखाई गई थीं. इस पर सिख संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और अकाल तख्त ने मान को खालसा पंथ विरोधी करार दिया. आम आदमी पार्टी ने आरोपों को खारिज किया और दावा किया कि वीडियो में दिख रहा शख्स मान नहीं है.

अब हरियाणा के एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट जसप्रीत ने आरोप लगाया है कि पंजाब सरकार के अधिकारी बनकर कुछ लोग उनके पास आए और उनसे ऐसी रिपोर्ट बनवाने को कहा जो साबित करे कि वीडियो फर्जी है और शख्स मान नहीं है. उन्हें फाइव स्टार होटल में बुलाया गया, धमकाया गया और गाड़ी में जबरदस्ती 10 लाख रुपये नकद रखे गए. इनकार करने पर उन्हें सिरसा के अरुण महेंद्रा और जींद के अंकित से मिलवाया गया, जिन्हें अधिकारियों ने पेन ड्राइव सौंपी थी.

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बाद में दो प्राइवेट कंपनियों, सिफर सेंटिनल लैब और साइबरयान लैब्स से रिपोर्ट तैयार करवाई गई, जिनके ड्राफ्ट वॉट्सऐप पर अधिकारियों से शेयर किए गए और बदलाव के सुझाव दिए गए. जसप्रीत ने पुलिस सुरक्षा और डिजिटल सबूतों की सुरक्षा की मांग की है. 

गुरुग्राम पुलिस ने मंगलवार को दिए अपने बयान में कहा कि यह मामला शुरुआती जांच, तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल सबूतों की पड़ताल, पैसों के लेनदेन की जांच और दूसरी उपलब्ध जानकारी के आधार पर दर्ज किया गया है.

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने भगवंत मान से तुरंत इस्तीफे की मांग की

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने कहा कि अकाल तख्त की अवहेलना करने के बाद मुख्यमंत्री के पास पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं बचा है. 

गुरुग्राम में दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए वड़िंग ने आरोप लगाया कि अकाल तख्त को गलत साबित करने के लिए अनुकूल फोरेंसिक रिपोर्ट हासिल करने की कोशिश की गई. उन्होंने इस मामले को बेहद गंभीर और शर्मनाक बताया.

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