मदद करने पर भी नहीं बख्शा! अफगान नागरिक समेत दर्जनों प्रवासियों पर ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई, भेजा अफ्रीका – us deports afghan iranian migrants central african republic ntc apdy


अमेरिका ने शनिवार(29 अगस्त) को कई लोगों को सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य भेज दिया. इनमें एक अफगान नागरिक भी शामिल है, जिसके भाइयों ने अमेरिकी सेना के साथ काम किया था. उसके वकील और एक संगठन ने इसकी जानकारी दी.

रिपोर्ट के अनुसार अफगान नागरिक की उम्र 20 साल  है. उसके वकील अल्मा डेविड के मुताबिक, एक अमेरिकी जज ने उसे अफगानिस्तान भेजे जाने से सुरक्षा दी थी, क्योंकि उसे तालिबान से खतरा था. अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक, अमेरिकी सेना के समर्थन में उसके भाइयों के किए गए काम के कारण अफगानिस्तान में उसके परिवार को तालिबान से धमकियां मिली थीं.

अल्मा डेविड ने बताया कि अफगान नागरिक का एक भाई अमेरिका में रहता है और अफगान नेशनल आर्मी में काम कर चुका है. यह सेना 2021 में तालिबान के सत्ता में आने से पहले अमेरिकी सेना के साथ मिलकर काम करती थी. उनके मुताबिक, उसका एक अन्य भाई अमेरिकी प्रशिक्षण प्राप्त पायलट था, जिसे तालिबान ने मार दिया था.

इन लोगों को भेजा गया 

शनिवार को सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य की राजधानी बांगुई पहुंची निर्वासन उड़ान में 12 अफगान और 8 ईरानी नागरिक शामिल थे. इसके अलावा नेपाल और निकारागुआ के कई लोग भी इस उड़ान में थे. ह्यूमन राइट्स फर्स्ट की नीति, शरणार्थी और अप्रवासी अधिकार निदेशक सावी अरवे ने इसकी जानकारी दी. अधिकार संगठनों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने कई गुप्त समझौतों के तहत हजारों लोगों को ऐसे करीब दो दर्जन देशों में भेजा है, जो उनके अपने देश नहीं हैं. यह कदम प्रशासन की इमिग्रेशन कार्रवाई के तहत उठाया गया है.

पहले भी भेजा जा चुका है 

इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल कानूनी रास्ते के तौर पर किया जा रहा है, जिसके जरिए कुछ शरण मांगने वालों को अप्रत्यक्ष रूप से उन देशों में वापस भेजा जा रहा है, जहां से वे भागे थे. शनिवार की उड़ान जून के बाद सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य के लिए दूसरी ऐसी उड़ान थी. जून में भेजी गई उड़ान में करीब दो दर्जन प्रवासी शामिल थे, जिनमें एक ईरानी महिला भी थी, जिसे अपने देश में उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था.

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