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‘मैं मुसलमान हूं, मुझे हिंदू ताऊ ने पाला’…कांवड़ लाने वाले दिल्ली के शिवभक्त समीर की कहानी – I am a muslman Hindu uncle raised me muslim shiv bhakt sameer kanwar yatra story lclg 


सावन का महीना आते ही सड़कें एक बार फिर बोल बम के जयघोष से गूंज उठी हैं. लाखों शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं. इन्हीं कांवड़ियों की भीड़ में एक चेहरा ऐसा भी है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.  नाम है समीर. वह खुद को मुस्लिम बताता है, लेकिन पूरी श्रद्धा के साथ कांवड़ यात्रा में शामिल होकर गंगाजल लेकर चल रहा है.

समीर की बात इसलिए चर्चा में है क्योंकि वह मोदी-योगी की तस्वीर लगी कांवड़ लेकर चल रहे ग्रुप में है. अपनी आस्था को किसी एक पहचान तक सीमित नहीं मानता. उसका कहना है कि वह अपने धर्म का भी सम्मान करता है और अपने हिंदू परिवार की परंपराओं का भी. उसके शब्दों में, ‘मैं मुसलमान हूं, लेकिन हिंदू धर्म का भी सम्मान करता हूं.’ 

कांवड़ यात्रा में समीर की मौजूदगी बनी चर्चा

कांवड़ यात्रा के दौरान बातचीत में समीर ने बताया कि वह दिल्ली का रहने वाला है और हर साल श्रद्धा के साथ इस यात्रा में शामिल होने की कोशिश करता है. जब उससे पूछा गया कि कांवड़ लेकर आने की प्रेरणा कहां से मिली, तो उसने कहा कि उसकी सबसे बड़ी कामना देश और समाज की भलाई से जुड़ी है. समीर ने कहा कि वह चाहता है कि गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान मिले. इसके साथ ही उसने अपने जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए भी भगवान शिव से प्रार्थना की है. उसका कहना था कि आस्था किसी से भेदभाव नहीं करती. इंसान अगर सच्चे मन से प्रार्थना करे तो भगवान उसकी भावना देखते हैं, पहचान नहीं.

मैं दोनों धर्मों का सम्मान करता हूं

बातचीत के दौरान समीर ने अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया. उसने बताया कि वह मुस्लिम परिवार से है, लेकिन उसके जीवन में एक हिंदू रिश्तेदार की बहुत बड़ी भूमिका रही. समीर के अनुसार, बचपन में उसके पिता के निधन के बाद उसके हिंदू ताऊ ने उसे अपने बेटे की तरह पाला-पोसा. उसी माहौल में उसने दोनों धर्मों की परंपराओं और संस्कारों को करीब से देखा. वह कहता है, मैं मुसलमान हूं, लेकिन हिंदू धर्म का भी सम्मान करता हूं. दोनों धर्मों को निभाना ही मैंने सीखा है.  समीर के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने परिवार, रिश्तों और संस्कारों के प्रति सम्मान जताने का भी माध्यम है.

देश में भाईचारा बना रहे

समीर का कहना है कि उसकी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि देश में प्रेम और भाईचारा बना रहे. उसने कहा कि जब लोग एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हैं, तभी समाज मजबूत बनता है. उसने भगवान शिव से अपने परिवार की खुशहाली, देश की तरक्की और समाज में सौहार्द बनाए रखने की भी प्रार्थना की.

कांवड़ यात्रा में दिखती है विविधता

हर साल सावन में निकलने वाली कांवड़ यात्रा में देश के अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग शामिल होते हैं. इस यात्रा में कई बार ऐसे उदाहरण भी सामने आते हैं, जहां अलग-अलग समुदायों के लोग सेवा, सहयोग या श्रद्धा के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ते दिखाई देते हैं. समीर की मौजूदगी भी इसी तरह की एक तस्वीर पेश करती है. वह कहता है कि उसके लिए इंसानियत और सम्मान सबसे पहले हैं. धर्म अपनी जगह है, लेकिन दूसरों की आस्था का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है.

आस्था के चलते लगाई मोदी-योगी की फोटो 

कांवड़ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें लगाने वाले नीरज कहते हैं कि उन्होंने अपनी श्रद्धा और व्यक्तिगत आस्था के चलते लगाई हैं. नीरज ने कहा कि उनकी टोली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भगवान का दर्जा देती है. उन्होंने बताया कि इसी भावना के साथ वे यह विशेष कांवड़ लेकर निकले हैं. उन्होंने कहा कि उनकी प्रार्थना है कि भविष्य में भी योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश का नेतृत्व करें और नरेंद्र मोदी देश का नेतृत्व करते रहें. यह उनके व्यक्तिगत विश्वास और मन्नत का हिस्सा है.

गौ माता को राष्ट्रमाता बनाने की मांग

इस कांवड़ पर सिर्फ तस्वीरें ही नहीं थीं, बल्कि गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग वाले पोस्टर भी लगाए गए थे. नीरज ने बताया कि वर्ष 2025 में भी उन्होंने इसी तरह की कांवड़ यात्रा निकाली थी और तब भी उनकी यही मांग थी. इस बार भी उन्होंने अपनी यात्रा को उसी मांग से जोड़ते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि गौ माता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिया जाए.

 

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