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रामायण पर बनी सबसे विवादित फिल्म! सीता की जुबानी कही कहानी पर मचा था हंगामा, स्क्रीनिंग तक करनी पड़ी रद्द! – Ramayana most controversial film not adipurush sita sings the blues animated movie explained tmova


जब भी रामायण पर कोई नई फिल्म या सीरीज बनने की घोषणा होती है, तो उसकी तुलना सबसे पहले रामानंद सागर की ‘रामायण’ या इंडो-जापानी एनीमे ‘Ramayana: The Legend of Prince Rama’ से होने लगती है. वहीं, ओम राउत की ‘आदिपुरुष’ का नाम अब अक्सर इस बात की मिसाल के तौर पर लिया जाता है कि रामायण को किस तरह नहीं दिखाया जाना चाहिए.

इन दिनों नितेश तिवारी की ‘रामायण‘ रिलीज से पहले ही अपनी कास्टिंग और VFX को लेकर चर्चा में है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय अमेरिका में बनी रामायण की एक फिल्म ‘आदिपुरुष’ से भी ज्यादा विवादों में घिर गई थी?

क्या है ‘सीता सिंग्स द ब्लूज’?

साल 2008 में अमेरिकी कलाकार नीना पाले (Nina Paley) ने ‘Sita Sings the Blues’ नाम की एक एनिमेटेड म्यूजिकल फिल्म बनाई थी. यह फिल्म उनके भारत में बिताए गए समय और उनके निजी अनुभवों से प्रेरित थी. नीना ने इसे ‘अब तक की सबसे बड़ी ब्रेकअप स्टोरी’ कहकर प्रमोट किया था.

यह रामायण की एक हल्के-फुल्के अंदाज और फेमिनिस्ट नजरिए से बनाई गई कहानी थी, जिसमें सीता के दर्द और उनके नजरिए को ज्यादा अहमियत दी गई थी. फिल्म में वेक्टर ग्राफिक्स, भारतीय शैडो पपेट्स (छाया कठपुतली कला) और राजपूत व पहाड़ी मिनिएचर पेंटिंग्स से प्रेरित 2D एनिमेशन का इस्तेमाल किया गया था.

इतना ही नहीं, नीना ने अपनी निजी जिंदगी के कुछ हिस्सों को भी फिल्म में जोड़ा, ताकि एक देवी और आज की महिला के रिश्तों और दिल टूटने के अनुभवों के बीच समानता दिखाई जा सके. पूरी फिल्म 1920 के दशक के जैज गानों के साथ पेश की गई.

नीना ने इस फिल्म को- सच्चाई, न्याय और बराबरी के लिए एक महिला की पुकार, बताया था. साल 2009 में फिल्म की कुछ DVD कॉपियां जारी की गईं और बाद में इसे फिल्म की आधिकारिक वेबसाइट पर फ्री डाउनलोड के लिए भी उपलब्ध कराया गया.

इंटरनेट पर हुई वायरल, फिर शुरू हुआ विवाद

उस समय सोशल मीडिया आज जितना बड़ा नहीं था, लेकिन इसके बावजूद ‘सीता सिंग्स द ब्लूज’ इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गई. फिल्म को आलोचकों ने खूब सराहा. रोटेन टोमैटोज पर इसे 100% रेटिंग मिली, जबकि पॉपकॉर्न मीटर पर 85% स्कोर मिला. इसकी कहानी और अलग तरह की एनिमेशन स्टाइल की काफी तारीफ हुई.

लेकिन जितनी तारीफ मिली, उतना ही विरोध भी शुरू हो गया. साल 2009 में हिंदू जनजागृति समिति ने इस फिल्म पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए एक याचिका शुरू की. संगठन का आरोप था कि फिल्म में भगवान राम की छवि को अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है. हालांकि विरोध के बावजूद फिल्म की लोकप्रियता भारत ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों में भी लगातार बढ़ती गई.

नीना पाले ने क्या कहा था?

साल 2010 में दिए एक इंटरव्यू में नीना पाले ने भारतीयों की नाराजगी पर प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा कि कई लोगों के लिए 1980 के दशक की रामानंद सागर की ‘रामायण’ ही असली कहानी है. अगर कोई दूसरी व्याख्या सामने आती है, तो उसे लोग गलत मान लेते हैं.

नीना के मुताबिक, लोग किसी दूसरी प्रस्तुति को देखने या स्वीकार करने की जरूरत ही महसूस नहीं करते. फिल्म की सबसे बड़ी खासियत और सबसे बड़ा विवाद एक ही चीज बनी.

कई लोगों को पसंद आया कि इस फिल्म में सीता के दर्द, संघर्ष और नजरिए को खुलकर दिखाया गया और उन्हें अपनी बात कहने का मौका मिला. लेकिन दूसरी तरफ, कई लोगों ने इसी बात का विरोध किया क्योंकि फिल्म में भगवान राम को पारंपरिक रूप से दिखाए जाने वाले आदर्श रूप से अलग तरीके से पेश किया गया था. यही वजह थी कि यह फिल्म लगातार विवादों में बनी रही.

प्रदर्शन हुए, कई जगह स्क्रीनिंग भी रद्द

साल 2011 में अमेरिका के सैन होजे म्यूजियम ऑफ आर्ट में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान हिंदू जनजागृति समिति ने विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद न्यूयॉर्क के स्टारलाइट पवैलियन और गोवा के आर्ट चैंम्बर में फिल्म की स्क्रीनिंग भी रद्द कर दी गई.

बाद के वर्षों में, 2017 में नीना पाले अपने ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े विचारों को लेकर भी विवादों में रहीं, लेकिन उनकी फिल्म ‘सीता सिंग्स द ब्लूज’ आज भी बहस का विषय बनी हुई है. कुछ लोग इसे रामायण की एक अलग और आधुनिक व्याख्या मानते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इसने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई.

फिलहाल, ‘सीता सिंग्स द ब्लूज’ देखने के लिए यूट्यूब पर उपलब्ध है.

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