सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मलबे को जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर चुनौती फाटक के पास डलवाया गया. वहीं दूसरी जगह अंबाला रोड पर बड़ी नहर से पहले कब्रिस्तान के बाहर पड़े मलबे को देखने के लिए कुछ मुस्लिम लोग पहुंचे. लोगों ने मलबे से ईंटें उठाईं, उनके वीडियो बनाए और सोशल मीडिया पर शेयर किए. कुछ ईंटों पर 1911 और कुछ पर 1909 लिखा होने का दावा किया गया. इसके बाद कई लोग इन ईंटों को अपने घर ले जाते भी नजर आए.
मलबे से ईंटें उठाए जाने और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की. देर रात जेसीबी की मदद से अंबाला रोड पर पड़े मलबे को हटवाया गया और नगर निगम की गाड़ियों में भरकर उसे चुनौती फाटक के पास दिल्ली रोड पर निर्धारित स्थान पर डलवा दिया गया. इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मलबे की सुरक्षा बढ़ा दी है और मौके पर पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है.
अब चुनौती फाटक के पास पड़े मस्जिद के मलबे के आसपास पुलिस निगरानी कर रही है और लोगों को वहां पहुंचने या मलबे से कुछ उठाने की अनुमति नहीं दी जा रही है. मलबे में मस्जिद के कुछ अवशेष नजर आने के बाद प्रशासन ने उसे ग्रीन नेट से ढकवा दिया है. इसका उद्देश्य मलबे को सुरक्षित रखना और किसी भी तरह की ईंट या अन्य अवशेष को वहां से उठाकर ले जाने से रोकना है. मौके पर पुलिस की मौजूदगी के बीच पूरे मलबे की निगरानी की जा रही है.
आपको बता दें कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद अवैध घोषित मस्जिद को प्रशासन ने बीते दिनों भारी पुलिस बल और 4 बुलडोजरों की मदद से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करके पूरी तरह हटा दिया. अदालत द्वारा फर्स्ट अपील खारिज किए जाने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के तहत यह कदम उठाया गया था. इस कार्रवाई का विरोध करने और मौके पर जाने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने सपा सांसद इकरा हसन, सपा विधायक आशु मलिक और कई अन्य नेताओं को उनके घरों में नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया था. विपक्ष का आरोप है कि उन्हें बिना मौका दिए और कानून का उल्लंघन करके यह ध्वस्तीकरण किया गया है.
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